MP News: मध्य प्रदेश के सागर जिले में गेहूं खरीदी प्रक्रिया के दौरान सामने आए एक बड़े घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मेहनत और सरकारी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता को झटका देने वाले इस मामले में गेहूं की बोरियों में बड़ी मात्रा में मिट्टी और कंकड़ मिलने की पुष्टि हुई है। खास बात यह है कि यह मामला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के गृह जिले से जुड़ा हुआ है। जैसे ही अनियमितताओं की जानकारी सामने आई वैसे ही मंत्री ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को तत्काल और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। मामले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। किसानों के हितों से जुड़े इस प्रकरण को सरकार अपनी साख से जोड़कर देख रही है।
जांच में खुली परतें, अधिकारियों पर गिरी कार्रवाई की गाज
मंत्री के निर्देश के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रथम दृष्टया लापरवाही के आरोप में सहायक आपूर्ति अधिकारी निशांत पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वहीं जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल को सागर जिले के प्रभार से हटाकर भोपाल मुख्यालय में उपस्थित होने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया में गंभीर चूक सामने आई है। यही कारण है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की शुरुआत कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मामले को केवल विभागीय लापरवाही मानकर नहीं छोड़ा जाएगा बल्कि इसकी पूरी जिम्मेदारी तय की जाएगी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में गड़बड़ी आखिर कैसे हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
600 बोरियों में मिला मिट्टी और कंकड़, वेयरहाउस बना जांच का केंद्र
पूरा मामला सागर जिले के गंभीरिया स्थित लक्ष्मी नगर के देव प्रभाकर हाउस वेयरहाउस से जुड़ा है। यहां हाल ही में रखी गई गेहूं की बोरियों की जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्रशासनिक जांच में करीब 600 बोरियों में 30 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक मिट्टी और कंकड़ भरे होने की पुष्टि हुई। यह खुलासा होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। किसानों के नाम पर खरीदे गए गेहूं की जगह मिट्टी भरी बोरियां मिलना न केवल आर्थिक नुकसान का मामला है बल्कि यह पूरी खरीद प्रणाली पर सवाल खड़े करता है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निर्देश पर संबंधित स्व सहायता समूह के पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल विस्तृत जांच जारी है और कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
दोषियों को नहीं मिलेगी राहत, सरकार ने दी सख्त चेतावनी
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने साफ शब्दों में कहा है कि किसानों के अधिकारों और उनकी मेहनत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि खाद्य विभाग के अलावा उपार्जन प्रक्रिया से जुड़े अन्य विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जाए। मंत्री ने कहा कि जो भी व्यक्ति या संस्था इस घोटाले में शामिल पाई जाएगी उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है इसलिए भ्रष्टाचार और लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उपार्जन केंद्रों और वेयरहाउसों की निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। सरकार की इस सख्त चेतावनी के बाद अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


