MP News: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से इंसानियत और पशु प्रेम की एक अनोखी कहानी सामने आई है। जहां आमतौर पर लोग अपना जन्मदिन धूमधाम और पार्टियों के साथ मनाते हैं, वहीं शिवसेना एमपी के प्रभारी सुरेश गुर्जर ने अपने 55वें जन्मदिन को सेवा और संवेदनशीलता के साथ मनाया। उन्होंने शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर 51 हजार स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाने का संकल्प लिया और इसे एक बड़े अभियान का रूप दिया। इस पहल के जरिए उन्होंने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया कि बेजुबान जानवरों की सेवा भी उतनी ही जरूरी है जितनी इंसानों की मदद।
नकारात्मक माहौल के बीच सकारात्मक सोच की अनोखी पहल
इंदौर सहित कई शहरों में स्ट्रीट डॉग्स को लेकर अक्सर नकारात्मक खबरें सामने आती रहती हैं, जहां लोग उन्हें भगाते हैं या नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ऐसे माहौल में सुरेश गुर्जर की यह पहल उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरी है। उन्होंने अपने जन्मदिन को दिखावे से दूर रखते हुए सादगी और सेवा का रास्ता चुना। इस दौरान उनके साथ शिवसेना के कई पदाधिकारी और सामाजिक संगठन के लोग भी जुड़े, जिन्होंने इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई। इस पहल ने शहर में एक नई सोच को जन्म दिया और लोगों को प्रेरित किया कि वे भी समाज के कमजोर वर्गों और बेजुबान जानवरों के प्रति संवेदनशील बनें।
संघर्ष से सेवा तक की प्रेरणादायक कहानी
सुरेश गुर्जर ने इस पहल के पीछे की अपनी व्यक्तिगत कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि जीवन में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक समय ऐसा भी आया जब वे आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हो गए थे और कर्ज में डूब गए थे। उन्होंने कहा कि कठिन समय में उन्होंने बेजुबान पशुओं की सेवा शुरू की, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया। धीरे-धीरे परिस्थितियां सुधरीं और आज वे फिर से स्थापित हो गए हैं। उनका मानना है कि पशु सेवा से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिली, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी।
डॉग लवर की पहचान और भविष्य में अभियान जारी रखने का संकल्प
सुरेश गुर्जर खुद को एक डॉग लवर मानते हैं और उनके घर व फार्महाउस पर भी कई कुत्ते रहते हैं, जिनकी वे देखभाल करते हैं। उन्होंने बताया कि सड़कों पर रहने वाले कुत्तों के लिए भोजन और देखभाल की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होती, इसी सोच के साथ उन्होंने यह अभियान शुरू किया। वे अपनी गाड़ी में दूध, बिस्किट, टोस्ट और अन्य खाद्य सामग्री लेकर शहरभर में घूमे और कुत्तों को भोजन कराया। दिलचस्प बात यह रही कि जैसे ही उनकी गाड़ी का हॉर्न बजता, कुत्ते दौड़कर उनके पास पहुंच जाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे भी लगातार जारी रहेगा।


