भोपाल के ‘अपना घर’ वृद्धाश्रम में 4 अगस्त को घनश्याम राजपूत नामक एक बुजुर्ग का निधन हो गया। यह कहानी एक ऐसे पिता के त्याग और बच्चों की कथित उपेक्षा को दर्शाती है, जिसने जीवन भर संघर्ष कर अपने परिवार के लिए घर बनाया, लेकिन अंत में उन्हें वृद्धाश्रम में अकेला छोड़ दिया गया।
जीवन भर का संघर्ष और अंत
घनश्याम राजपूत ने पंचर बनाकर अपने चार बच्चों का पालन-पोषण किया और इंदौर में एक मकान भी बनवाया। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी अपने परिवार की खुशियों के लिए समर्पित कर दी। दुर्भाग्यवश, उनके बच्चों ने उन्हें लावारिस छोड़ दिया, जिसके कारण उन्हें वृद्धाश्रम में शरण लेनी पड़ी।
अंतिम संस्कार और परिवार की अनुपस्थिति
निधन के बाद, वृद्धाश्रम प्रबंधन ने दो दिनों तक उनके बच्चों का इंतजार किया, ताकि वे अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें। हालांकि, कोई भी परिजन नहीं पहुंचा। आखिरकार, समाजसेवियों ने मिलकर घनश्याम राजपूत का अंतिम संस्कार किया, जिससे एक समर्पित पिता की कहानी का दुखद अंत हुआ।