मध्य प्रदेश नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर-चंबल संभाग के छात्रों को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। छात्रों ने हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें परीक्षा में बैठने के लिए CBI जांच को अनिवार्य शर्त बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अपने कॉलेज प्रबंधन से जवाब मांगें और राहत के लिए उचित कानूनी मंच का रुख करें।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी राहत देने से इनकार?
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्रों को उन कॉलेजों से सवाल करने चाहिए जिन्हें उन्होंने भारी फीस दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि कॉलेज नियमानुसार चल रहे हैं, तो CBI जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा। 2021 की समिति की जांच में फैकल्टी डुप्लीकेसी जैसे गंभीर पहलुओं की अनदेखी हुई थी, जिसे देखते हुए अदालत ने छात्रों को परीक्षा की अनुमति देने से मना कर दिया।
हाईकोर्ट की CBI जांच पर अडिग शर्त
जबलपुर हाईकोर्ट ने भी अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि बिना CBI जांच के कॉलेजों को कोई राहत नहीं मिलेगी। हालांकि, कोर्ट ने यह विकल्प दिया है कि यदि कॉलेज लिखित में जांच के लिए तैयार हों और सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण ले आएं, तो भविष्य में छात्रों की परीक्षाओं पर विचार किया जा सकता है।