छह महीने में छह गुना तक बढ़ा भोपाल व अन्‍य प्रमुख शहरों में वायु प्रदूषण

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By Sharma Published On: November 22, 2020
air pollution

कोरोना संक्रमण के प्रकोप को थामने के लिए इस साल में मार्च में लागू हुए लॉकडाउन का एक अच्‍छा प्रभाव यह भी देखा गया था कि तमाम शहरों की आबोहवा स्‍वच्‍छ हो गई थी। लेकिन अनलॉक के दौर में वायु गुणवत्‍ता के मामले में हालात फ‍िर बिगड़ने लगे हैं। आलम यह है कि भोपाल समेत ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर जैसे शहरों में छह गुणा वायु प्रदूषण बढ़ गया है।

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यह बढ़ोतरी लॉकडाउन के बाद से लेकर अभी तक छह महीने के भीतर हुई है। हवा मार्च से मई के बीच लॉकडाउन में साफ थी इस वजह से प्रदूषण की स्थिति बताने वाला एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 45 से 50 के बीच आ गया था। नवंबर में अब तक इंडेक्स 300 से 340 के पार पहुंच चुका है। इस तरह छह माह में वायु प्रदूषण में छह गुना तक बढ़ोतरी हुई है। आगे भी प्रदूषण में तेजी से बढ़ोतरी तय है लेकिन उस अनुरूप नियंत्रण पाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। प्रदूषित हवा लोगों के स्वास्थ्य को सीधा प्रभावित करती है। मरीजों के लिए तो और भी तकलीफें हो रही हैं।

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लॉकडाउन में इसलिए साफ थी हवा

लॉकडाउन में वाहनों का आवागमन व उद्योग, कारखाने बंद थे। इस वजह से वाहनों व उद्योगों से निकलने वाले जहरीले धुएं का स्तर बिल्कुल नहीं था। निर्माण कार्य बंद होने की वजह से धूल के कण भी नहीं फैल रहे थे। वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हर तरह की गतिविधियां बंद थीं, इस वजह से भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, कटनी, सिंगरौली, सतना और उज्जैन जैसे अधिक वायु प्रदूषण वाले शहरों का एयर क्‍वालिटी इंडेक्स 45-50 के स्‍तर पर आ गया था। अब राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिले आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2020 में इन शहरों में एयर क्‍वालिटी इंडेक्स 300 से 340 पहुंच चुका है।

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वायु प्रदूषण में इसलिए हो रही बढ़ोतरी

लॉकडाउन के बाद वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। उद्योग-धंधे चालू हो चुके हैं। इस वजह से सभी शहरों में धुएं का स्तर बढ़ गया है। निर्माण गतिविधियां भी रफ्तार पकड़ रही हैं, जिनमें से 75 फ़ीसद निर्माण कार्य बिना कवर्ड किए हो रहे हैं। इस वजह से धूल के कण वातावरण में बने हुए हैं। बारिश के बाद खराब सड़कें अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं की गई हैं। ऐसी सड़कों पर वाहनों के दौड़ने से धूल वातावरण में फैल रही है।

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भोपाल समेत कुछ शहरों में घरों से निकलने वाले कचरे को जलाने की प्रवृत्तियां अभी भी बंद नहीं हुई है। इस कचरे में पॉलीथिन आदि भी जलाते हैं, जिनका धुआं बहुत ही जहरीला होता है। ये सभी मिलकर हवा की सेहत को बिगाड़ रहे हैं। वैसे भी ठंड के दिनों में नमी का स्तर बढ़ जाता है, इस वजह से प्रदूषण फैलाने वाली गैसें और कण भारी हो जाते हैं और निचली सतह पर बने रहते हैं। इसलिए भी प्रदूषण का स्तर हर साल ठंड के दिनों में बढ़ जाता है।

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