Premanand Ji Maharaj पर बवाल के बीच बाबा Dhirendra Krishna Shastri का समर्थन, बोले- ‘सच बोलना सबसे कठिन

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By Sharma Published On: August 8, 2025
Premanand Ji Maharaj पर बवाल के बीच बाबा Dhirendra Krishna Shastri का समर्थन, बोले- 'सच बोलना सबसे कठिन

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर Dhirendra Krishna Shastri उर्फ बाबा बागेश्वर ने Premanand Ji Maharaj के समर्थन में खुलकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग संत प्रेमानंद जी का विरोध कर रहे हैं, उन्हें ‘पेट में दर्द’ है। बाबा ने साफ कहा कि आज के दौर में सच बोलना सबसे बड़ा अपराध बन गया है, और जो सच बोलते हैं, उन्हें विरोध झेलना पड़ता है।

‘जिन्हें हमारी बातें चुभती हैं, वो अंदर से खोखले हैं’ – बाबा बागेश्वर का तंज

बाबा बागेश्वर ने विरोधियों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि “कुछ लोगों को खुजली होती है”। उन्होंने कहा कि संत प्रेमानंद जैसे संत, जो केवल भजन और प्रवचन करते हैं, उन पर भी हमला करना यह दिखाता है कि आज के समाज में सहनशीलता कितनी कम हो गई है। बाबा का कहना है कि समाज में दो धड़े हैं—एक जो सनातन को मानता है और एक जो सनातन से नफरत करता है।

Premanand Ji Maharaj पर बवाल के बीच बाबा Dhirendra Krishna Shastri का समर्थन, बोले- 'सच बोलना सबसे कठिन

‘हम चेहरे पर कहते हैं बात, इसलिए चुभता है सच’ – बागेश्वर सरकार

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि वे बिना किसी डर के मंच से बोलते हैं कि वह ‘हिंदुत्व समर्थक’ हैं और उन्हें इस पर गर्व है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनेता जाति की राजनीति कर चमकते हैं, पर हम राष्ट्रवाद के पक्षधर हैं। बाबा ने दो टूक कहा कि उन्हें इस देश में “वासना के पुजारी” नजर आते हैं, और वह सिर्फ किसी एक मज़हब की ओर इशारा नहीं कर रहे थे – “मौलवी हो या पादरी, कोई भी हो सकता है।”

संत प्रेमानंद का जवाब: ‘दुष्टों को अमृत भी अच्छा नहीं लगता’

विवादों के बीच संत प्रेमानंद महाराज ने भी अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया। अपने सत्संग में उन्होंने कहा, “जिसका आचरण गंदा होता है, उसे प्रवचन अच्छे नहीं लगते। जैसे नाले का कीड़ा नाले में ही अच्छा लगता है, उसे अमृत कुंड में भी रखा जाए तो घुटन होगी।” इस बयान से उन्होंने यह जताया कि आलोचक स्वयं ही असंस्कारी हैं।

सोशल मीडिया पर गरमाया विवाद, सनातन संस्कृति बनाम आलोचना की बहस

यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक पक्ष संत प्रेमानंद और बाबा बागेश्वर के समर्थन में उतर आया है, वहीं दूसरा पक्ष उन्हें ‘विवादास्पद बयान’ देने वाला बता रहा है। यह बहस सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि वैचारिक टकराव को भी दर्शा रही है—जहां सनातन संस्कृति, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के विचार पर सवाल उठाए जा रहे हैं।