Bhopal Gas Tragedy: 40 साल बाद मिली मुक्ति! भोपाल गैस त्रासदी का आखिरी ज़हर भी हुआ खत्म, खत्म हुआ एक दर्दनाक अध्याय

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By Sharma Published On: July 1, 2025
Bhopal Gas Tragedy: 40 साल बाद मिली मुक्ति! भोपाल गैस त्रासदी का आखिरी ज़हर भी हुआ खत्म, खत्म हुआ एक दर्दनाक अध्याय

Bhopal Gas Tragedy को पूरे 40 साल हो चुके हैं लेकिन उसका दर्द और ज़हर अब तक ज़मीन में छिपा था। यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में जमा 337 टन जहरीले कचरे को आखिरकार जला दिया गया। यह प्रक्रिया मध्य प्रदेश के धार जिले के पीथमपुर स्थित प्लांट में की गई। यह फैसला लंबे समय तक कोर्ट में चला विवाद और स्थानीय विरोध के बाद लिया गया था। 29-30 जून की रात करीब 1 बजे इस जहरीले कचरे को पूरी तरह से राख में बदल दिया गया।

कैसे पहुंचा ज़हर पीथमपुर प्लांट तक

करीब 6 महीने पहले इस ज़हरीले कचरे को विशेष कंटेनरों में भरकर पीथमपुर लाया गया था। शुरुआत में तीन बार ट्रायल के रूप में 30 टन कचरा जलाया गया था। इसके बाद 5 मई से लेकर 29 जून की रात तक लगातार 55 दिनों में 307 टन कचरे को जलाया गया। इस पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के विशेषज्ञों की निगरानी में इसे 270 किलो प्रति घंटे की दर से जलाया गया।

Bhopal Gas Tragedy: 40 साल बाद मिली मुक्ति! भोपाल गैस त्रासदी का आखिरी ज़हर भी हुआ खत्म, खत्म हुआ एक दर्दनाक अध्याय

विरोध के बीच सावधानी से हुआ निपटान

इस काम को लेकर स्थानीय लोगों में पहले काफी नाराजगी थी। उन्हें डर था कि इतनी बड़ी मात्रा में जहरीले कचरे को जलाने से उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर पड़ेगा। लेकिन सरकार ने वैज्ञानिक प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों के साथ इसे अंजाम दिया। जले हुए कचरे की राख और अवशेषों को लीक-प्रूफ स्टोरेज में रखा गया है। नवंबर तक इस राख को विशेष लैंडफिल सेल्स में दफन किया जाएगा।

अभी भी जारी है बचा हुआ कचरा जलाना

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की मिट्टी में मिले 19 टन अतिरिक्त जहरीले कचरे को भी इसी प्लांट में 3 जुलाई तक जलाया जाएगा। इसका मतलब है कि अभी भी यह प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। लेकिन यह देश के लिए एक बड़ा कदम है जिसमें 40 साल पुरानी जहर की परतों को खत्म किया जा रहा है।

वो रात जो भारत कभी नहीं भूलेगा

2-3 दिसंबर 1984 की रात को भोपाल में यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था। इस गैस की चपेट में आकर कम से कम 5,479 लोगों की जान चली गई थी और हजारों लोग बीमार हो गए थे। यह भारत की सबसे भयावह औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक थी। अब जब उस त्रासदी से जुड़ा आखिरी ज़हर भी मिट रहा है तो देश एक गहरी सांस जरूर ले सकता है।