सुप्रीम कोर्ट को लेकर ट्वीट करने पर कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ अवमानना का केस

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By Sharma Published On: November 12, 2020
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सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में कुणाल कामरा (kunal kamra) के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अपनी सहमति दे दी है। जर्नलिस्ट अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत दिए जाने के बाद कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस मामले मेंं श्रीरंग काटनेशवारकर ने अवमानना कार्रवाई के लिए लेटर पिटिशन भेजा था। इस पर गौर करने के बाद अटॉर्नी जनरल ने सहमति दी ही।
 

फ्रीडम ऑफ स्पीच के मायने

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा है कि कुणाल कामरा ने जो ट्वीट की है वह बेहद आपत्तिजनक है और ऐसे में कुणाल कामरा (kunal kamra) के खिलाफ अदालत के अवमानना की कार्यवाही शुरू हो सकती है। अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि आजकल देखने को मिल रहा है कि लोग सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की निंदा करने लगे हैं। लोग समझते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर वह सीधे सुप्रीम कोर्ट और उसके जजों की निंदा कर सकते हैं।

कार्रवाई शुरू करने की सहमति –

लेकिन लोगों को समझना होगा कि विचार अभिव्यक्ति की जो आजादी मिली हुई है उसमें वाजिब प्रतिबंध है और इसके तहत अवमानना की कार्यवाही हो सकती है। लोगों को समझना होगा कि अगर सुप्रीम कोर्ट पर वह अटैक करेंगे तो उन्हें अवमानना के मामले में सजा होगी। अटॉर्नी जनरल ने कहा है कि इस कारण वह कुणाल कामरा के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में कार्यवाही शुरू करने के लिए अपनी सहमति देते हैं।

WhatsApp Image 2020-11-12 at 17.49.20.कुणाल कामरा के ट्वीट –

अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत के बाद कुणाल कामरा ने ट्वीट करते हुए लिखा था,’जिस गति से सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को ऑपरेट करती है यह समएक अन्य ट्वीट में कुणाल कामरा ने लिखा,’डीवाई चंद्रचूड़ एक फ्लाइट अटेंडेंट हैं जो प्रथम श्रेणी के यात्रियों को शैम्पेन ऑफर कर रहे हैं क्योंकि वो फास्ट ट्रैक्ड हैं। जबकि सामान्य लोगों को यह भी नहीं पता कि वो कभी चढ़ या बैठ भी पाएंगे, सर्व होने की तो बात ही नहीं है।’

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कुणाल कामरा के इन ट्वीट्स को न्यायालय की अवमानना माना जा रहा है। लेटर में फ्रीडम ऑफ स्पीच के बारे में पूरी डिटेल में बात कही गई है। बोलने का अधिकार है मगर देश की सर्वोच्च अदालत की अवमानना करने का अधिकार नहीं है।