Covid 19 In MP: मध्यप्रदेश में कोरोना का नया खतरा! 6 मौतें और सक्रिय केसों की चिंता, XFG वैरिएंट ने ली छठी जान

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By Sharma Published On: June 27, 2025
Covid 19 In MP: मध्यप्रदेश में कोरोना का नया खतरा! 6 मौतें और सक्रिय केसों की चिंता, XFG वैरिएंट ने ली छठी जान

Covid 19 In MP: गुरुवार को मध्यप्रदेश में इस साल कोरोना से छठी मौत दर्ज हुई। 50 वर्षीय महिला जो कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त थी, जैसे सेप्टिक शॉक, किडनी की समस्या, उच्च रक्तचाप, कोरोना संक्रमण, फेफड़ों में सूजन (ARDS), फेफड़ों में हवा भरना (प्न्यूमॉथोरेक्सिस), एसिडोसिस और मस्तिष्क संबंधी समस्या (एन्सेफलोपैथी)। इन सब कारणों से उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। इस साल कोरोना से हुई सभी मौतें महिलाएं हैं। इससे पहले भी पांच महिलाओं की कोरोना से मृत्यु हुई है, जिनमें भिंड, रतलाम, खंडगोने, इंदौर और मंडला की महिलाएं शामिल हैं।

मध्यप्रदेश में अब तक कुल 290 कोरोना मामले सामने आए हैं। इनमें से 59 मरीज अभी भी सक्रिय हैं जबकि 225 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना से हुई कुल मौतें अब छह हो गई हैं। यह आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि संक्रमण की गम्भीरता बनी हुई है और सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

Covid 19 In MP: मध्यप्रदेश में कोरोना का नया खतरा! 6 मौतें और सक्रिय केसों की चिंता, XFG वैरिएंट ने ली छठी जान

AIIMS भोपाल की हालिया जीनोम सिक्वेंसिंग रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में अब XFG वैरिएंट सक्रिय है। यह वैरिएंट जून के तीसरे सप्ताह में पाए गए संक्रमितों में मुख्य रूप से पाया गया। मई में LF.7 वैरिएंट अधिक सक्रिय था, जो जून के दौरान कमजोर होकर समाप्त हो गया। AIIMS ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से लिए गए 44 नमूनों की जांच की, जिनमें से 28 नमूनों में XFG वैरिएंट मिला। इसके अलावा XFG.3 नामक उप-वैरिएंट भी पाया गया जो XFG से विकसित हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, XFG वैरिएंट मई के अंतिम सप्ताह में उभरा और जून के पहले दो सप्ताहों में तेजी से फैल गया। तीसरे सप्ताह तक यह राज्य में एकमात्र सक्रिय वैरिएंट बन चुका था। LF.7 वैरिएंट जो मई में लगभग 50 प्रतिशत नमूनों में था, जून में कमजोर होकर खत्म हो गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि XFG और LF.7 दोनों वैरिएंट में कुछ म्यूटेशन ऐसे हैं जो टीकाकृत लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं, लेकिन लक्षण सामान्यतया हल्के होते हैं।

AIIMS भोपाल के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने कहा कि उनका वायरोलॉजी लैब लगातार नए वैरिएंट की पहचान कर रहा है। यह सिर्फ शोध का हिस्सा नहीं बल्कि महामारी से लड़ने की रणनीति का महत्वपूर्ण अंग है। AIIMS का मानना है कि SARS-CoV-2 की जीनोम सिक्वेंसिंग को राज्य और आसपास के क्षेत्रों में नियमित सार्वजनिक स्वास्थ्य अभ्यास के रूप में अपनाना चाहिए, ताकि संक्रमण के नए रूपों पर जल्दी से कार्रवाई की जा सके और भविष्य में बेहतर तैयारी की जा सके।