नई शिक्षा नीति युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक ज्ञान देगी : प्रधानमंत्री

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By Sharma Published On: September 8, 2020
Modi

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर राज्यपालों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया है। सरकार की ओर से 29 जुलाई को नई शिक्षा नीति का एलान किया गया। इस नीति पर अभी भी मंथन जारी है। पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा नीति में सरकार का प्रभाव कम होना चाहिए। वहीं, राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति इक्कीसवीं सदी की आवश्यकताओं व आकांक्षाओं के अनुरूप देशवासियों को, विशेषकर युवाओं को आगे ले जाने में सक्षम होगी। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, देश की आकांक्षाओं को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था होती है। शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी से केंद्र, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय, सभी जुड़े होते हैं। लेकिन ये भी सही है कि शिक्षा नीति में सरकार, उसका दखल, उसका प्रभाव, कम से कम होना चाहिए।

उन्होंने कहा, शिक्षा नीति से जितना शिक्षक, अभिभावक और छात्र जुड़े होंगे, उतना ही उनकी प्रासंगिकता और व्यापकता, दोनों ही बढ़ती है। देश के लाखों लोगों ने, शहर में रहने वाले, गांव में रहने वाले, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने, इसके लिए अपना फीडबैक दिया था। पीएम ने कहा, गांव में कोई शिक्षक हो या फिर बड़े-बड़े शिक्षाविद, सबको राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अपनी शिक्षा नीति लग रही है। सभी के मन में एक भावना है कि पहले की शिक्षा नीति में यही सुधार तो मैं होते हुए देखना चाहता था। ये एक बहुत बड़ी वजह है। प्रधानमंत्री ने कहा, आज दुनिया भविष्य में तेजी से बदलती नौकरियों, काम के तरीकों को लेकर चर्चा कर रही है। ये पॉलिसी देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक ज्ञान और कौशल, दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी। उन्होंने कहा, नई शिक्षा नीति, पढ़ने के बजाय सीखने पर फोकस करती है।