Ashoknagar में मानवता शर्मसार, उद्घाटन न होने पर युवक का अंतिम संस्कार बारिश में खुले में करना पड़ा

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By Sharma Published On: July 14, 2025
Ashoknagar में मानवता शर्मसार, उद्घाटन न होने पर युवक का अंतिम संस्कार बारिश में खुले में करना पड़ा

मध्य प्रदेश के Ashoknagar जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। चंदेरी क्षेत्र के नानकपुर गांव में एक युवक का अंतिम संस्कार बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे सिर्फ इसलिए करना पड़ा क्योंकि गांव के श्मशान घाट का ‘उद्घाटन’ नहीं हुआ था। 25 वर्षीय पवन कुमार अहिरवार हाल ही में एक दुर्घटना में घायल हुए थे और इलाज के बाद घर लौटे थे। लेकिन रविवार (13 जुलाई) को उनकी तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। जब परिजन उन्हें गांव के नए श्मशान घाट लेकर पहुंचे तो पंचायत सचिव सविता रजक ने कहा कि “श्मशान घाट का उद्घाटन नहीं हुआ है, इसलिए अंतिम संस्कार नहीं हो सकता।”

गांव और क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, ऐसे में परिजनों और ग्रामीणों को पास के खुले मैदान में अस्थायी व्यवस्था कर अंतिम संस्कार करना पड़ा। इस दौरान लोहे की टीन और लकड़ी की सहायता से ढांचा बनाया गया। कुछ लोग टीन को हाथ से पकड़े रहे ताकि शव भीग न जाए। कई बार डीजल डालकर चिता को जलाने की कोशिश करनी पड़ी क्योंकि बारिश से चिता बुझ जाती थी। यह दृश्य देखकर हर किसी के मन में यही सवाल था – “क्या मृत्यु के बाद भी न्याय उद्घाटन पर निर्भर रहेगा?”

Ashoknagar में मानवता शर्मसार, उद्घाटन न होने पर युवक का अंतिम संस्कार बारिश में खुले में करना पड़ा

न लकड़ी मिली, न प्रशासन की मदद

परिजनों का आरोप है कि उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए सहायता और लकड़ी की व्यवस्था के लिए पंचायत से गुहार लगाई थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट महीनों पहले बनकर तैयार हो चुका था, लेकिन सिर्फ “उद्घाटन न होने” की वजह से यह अमानवीय स्थिति बनी। परिजनों ने कहा कि यह घटना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि असंवेदनशीलता की चरम सीमा है। सवाल यह है कि अगर श्मशान घाट का उपयोग नहीं होना था, तो उसका निर्माण क्यों कराया गया? क्या मृत्यु के बाद भी ‘फीता काटने’ की रस्म का इंतजार करना पड़ेगा?

मामले को दबाने का प्रयास, विपक्ष ने उठाए सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरौलिया ने कहा कि मामला सार्वजनिक होने के बाद अब पंचायत सचिव मामले को दबाने का प्रयास कर रही हैं और पंचनामा तैयार करवा रही हैं। दबाव बनाकर बयान लिए जा रहे हैं, लेकिन तस्वीरें सब कुछ बयान कर रही हैं। इस घटना ने सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है, जिसने एक गरीब परिवार को भारी बारिश में खुले में अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने को मजबूर कर दिया।