टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में 6 सालों में हुई 170 बाघों की मौत, पिछले 8 महीने में 31 बाघों की हुई मौत

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By Sharma Published On: September 9, 2021
tiger deaths in mp

भोपाल। मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट कहा जाता है। देश भर में हो रही बाघों की मौत के मामले में भी मध्य प्रदेश नंबर 1 है। प्रदेश में पिछले 8 महीने में 31 बाघों की जान जा चुकी है। कुछ का शिकार किया गया, तो कुछ अपनी मौत मर गए। इसमें सबसे ज्यादा 18 मौतें टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हुई हैं। हाल ही में रातापानी सेंचुरी में भी 2 बाघों के शव मिले थे।

बाघों की मौत के मामले में पार्क प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। वन्य प्राणी प्रेमी बाघों की मौत का कारण टाइगर रिजर्व में ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति को मानते हैं, जिनका वाइल्ड लाइफ प्रबंधन से कोई लेना-देना नहीं है।

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दैनिक भास्कर के अनुसार PCCF वाइल्ड लाइफ आलोक कुमार ने बताया कि बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिसकी वजह से उनमें टेरिटोरियल फाइट होती है। इसमें कमजोर बाघ घायल होकर या तो इलाका छोड़ देता है या मर जाता है। जो कि प्राकृतिक है। टेरिटोरियल फाइट रोकने के लिए सेंचुरी बनाकर नए इलाके की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।

दरअसल पन्ना टाइगर रिजर्व में फरवरी 2009 में बाघ विहीन हो गया था। यहां बाघों के कुनबे को बढ़ाने के लिए दो अलग-अलग टाइगर रिजर्व से बाघ-बाघिनों को शिफ्ट किया गया।

 

इसके करीब ढाई साल बाद जंगल में अप्रैल 2012 में एक बाघिन ने 4 शावकों को जन्म दिया। इसके बाद यहां बाघों का कुनबा लगातार बढ़ता गया। वर्तमान में पन्ना में 31 बाघ हैं।

इसके साथ ही बाघों की मौत का सही कारण नहीं मिलने और मौत को दबाने के लिए हर बार एक घोषणा कर दी जाती है। हाल ही में वन मंत्री विजय शाह ने बुंदेलखंड में नई सेंचुरी घोषित की, जबकि कांग्रेस सरकार की प्रस्तावित 9 सेंचुरी की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। इसमें सीहोर की सरदार वल्लभ भाई सेंचुरी भी शामिल है।