Indore Traffic Jam: इंदौर में सड़क बनी मौत का फंदा! जाम में तड़पते रहे लोग, NHAI ने दे दी अनसुनी सफाई

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By Sharma Published On: July 2, 2025
Indore Traffic Jam: इंदौर में सड़क बनी मौत का फंदा! जाम में तड़पते रहे लोग, NHAI ने दे दी अनसुनी सफाई

Indore Traffic Jam: मध्यप्रदेश के इंदौर-देवास रोड पर 40 घंटे तक चले भयानक ट्रैफिक जाम ने तीन लोगों की जान ले ली। ये हादसा शुक्रवार को हुआ जब दो लोगों को दिल का दौरा पड़ा और एक मरीज की ऑक्सीजन खत्म हो गई। ये तीनों लोग समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए और सड़कों पर ही उनकी सांसें थम गईं। लोगों की आंखों के सामने ये त्रासदी घटी लेकिन प्रशासन की ओर से कोई त्वरित राहत नहीं पहुंच सकी।

हाई कोर्ट सख्त, सरकार और NHAI को फटकार

इस गंभीर मामले की सुनवाई जब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में हुई, तो न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और विनोद कुमार द्विवेदी ने सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को नोटिस भेजा। अदालत ने सख्त लहजे में जवाब मांगा कि आखिर सात महीने बाद भी सड़क निर्माण अधूरा क्यों है जबकि पहले ही एक महीने में सुधार का आदेश दिया गया था। बारिश के कारण हालात और बिगड़ते जा रहे हैं जिससे रोज़ाना हजारों लोग परेशान हैं।

Indore Traffic Jam: इंदौर में सड़क बनी मौत का फंदा! जाम में तड़पते रहे लोग, NHAI ने दे दी अनसुनी सफाई

NHAI का चौंकाने वाला जवाब: ‘लोग घर से जल्दी क्यों निकलते हैं?’

सुनवाई के दौरान जब NHAI की ओर से वकील अदालत में पेश हुए, तो उन्होंने ट्रैफिक जाम और उससे हुई मौतों को “गुमराह करने वाला” बताया। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कह दिया कि “लोग घर से इतनी जल्दी क्यों निकलते हैं?” कोर्ट में मौजूद सभी लोग इस तर्क से हैरान रह गए। इस गैरजिम्मेदाराना बयान पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और अगली सुनवाई की तारीख 7 जुलाई तय कर दी।

क्रशर यूनिट की हड़ताल को बताया कारण, पर कोर्ट नहीं हुआ संतुष्ट

NHAI ने अपने बचाव में तर्क दिया कि सड़क निर्माण में देरी क्रशर यूनिट की दस दिन की हड़ताल के कारण हुई है। लेकिन अदालत ने साफ कहा कि पहले ही तीन से चार महीने का समय मांगा गया था और वह भी अब बीत चुका है। जनता की जान और सुविधाएं ऐसे तर्कों से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

इनकी जान गई सिस्टम की लापरवाही से

जाम में फंसे जिन तीन लोगों की मौत हुई, वे थे इंदौर के कमल पंचाल (62), शुजालपुर के बलराम पटेल (55) और गरी पिपल्या गांव के संदीप पटेल (32)। कमल पंचाल को गर्मी और दम घुटने से दिल का दौरा पड़ा, वहीं संदीप की ऑक्सीजन खत्म हो गई और बलराम का परिवार उन्हें बचाने के लिए भटकता रहा। यह हादसा सिस्टम की असफलता की एक और कड़ी मिसाल बन गया।