MP High Court: MPहाई कोर्ट में बड़ा बदलाव, दिल्ली के अनुभवी जज बने 29वें मुख्य न्यायाधीश

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By Sharma Published On: July 17, 2025
MP High Court: भोपाल के राजभवन में गुरुवार को एक अहम समारोह में जस्टिस संजीव सचदेवा ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी अधिसूचना को पढ़ा जिसमें जस्टिस सचदेवा की नियुक्ति की घोषणा की गई थी

MP High Court: जस्टिस संजीव सचदेवा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 29वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं। मई 2025 से वे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी निभा रहे थे और अब उन्हें पूर्णकालिक पद पर नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति न्यायपालिका की स्थिरता और कार्य कुशलता के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

दिल्ली में जन्म और शिक्षा का सफर

संजीव सचदेवा का जन्म 26 दिसंबर 1964 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने 1985 में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीकॉम (ऑनर्स) किया और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ सेंटर से 1988 में एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद 1 अगस्त 1988 को उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में बतौर वकील रजिस्ट्रेशन कराया और वहीं से अपने करियर की शुरुआत की।

MP High Court: भोपाल के राजभवन में गुरुवार को एक अहम समारोह में जस्टिस संजीव सचदेवा ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जारी अधिसूचना को पढ़ा जिसमें जस्टिस सचदेवा की नियुक्ति की घोषणा की गई थी।

दिल्ली हाई कोर्ट से एमपी हाई कोर्ट तक का सफर

जस्टिस सचदेवा को 30 मई 2024 को दिल्ली हाई कोर्ट से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था। इसके बाद 9 जुलाई 2024 से 24 सितंबर 2024 तक उन्होंने पहली बार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम किया था। दूसरी बार 24 मई 2025 को उन्हें फिर से कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। अब उनकी स्थायी नियुक्ति के साथ हाई कोर्ट को नेतृत्व की स्पष्ट दिशा मिल गई है।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुरेश कैत की जगह ली

पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत के सेवानिवृत्त होने के बाद जस्टिस सचदेवा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कार्यवाहक रहते हुए भी उन्होंने कई अहम मामलों की सुनवाई की और प्रशासनिक ढांचे में निरंतरता बनाए रखी। अब उनकी नियुक्ति से राज्य की न्याय व्यवस्था को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।