MP News: डॉक्टर की लापरवाही ने परिवार को दिया झटका, नवजात का मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी

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By Input Published On: March 20, 2026
MP News: डॉक्टर की लापरवाही ने परिवार को दिया झटका, नवजात का मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। एक नवजात शिशु को जन्म के कुछ ही समय बाद ड्यूटी डॉक्टर द्वारा मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों को इस बात की जानकारी मिली और परिवार में मातम छा गया। डाक्टर ने नवजात का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया था, जिससे परिजन बच्चे को दफनाने की तैयारी में जुट गए थे। यह घटना अस्पताल की डाक्टरी लापरवाही को उजागर करती है और लोगों के बीच डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है।

परिवार में मचा मातम: कफन तैयार और दफनाने की तैयारी

मिली जानकारी के अनुसार, नवजात का जन्म लगभग सुबह 7:00 से 7:30 बजे के बीच हुआ। उसके कुछ ही समय बाद सवा 8 बजे डाक्टर ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। परिवार ने इस खबर से शोक मनाना शुरू कर दिया और कफन खरीद कर दफनाने की तैयारी भी की। अस्पताल में मौजूद अन्य स्टाफ और परिजन भी इस अचानक हुई त्रासदी से स्तब्ध रह गए। परिजनों का कहना है कि चार घंटे तक वे इस दुख की घड़ी में बच्चे की मृत्य को लेकर परेशान रहे, और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए।

डाक्टर की लापरवाही ने परिवार को झटका दिया

इस पूरे घटनाक्रम में मुख्य जिम्मेदार ड्यूटी डॉक्टर को माना जा रहा है। डॉक्टर ने बच्चे की स्थिति का सही आकलन नहीं किया और उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में जन्म के बाद नवजात की जीवन रेखा पर नजर रखने में चूक हुई। चार घंटे बाद जब बच्चे की जीवित अवस्था का पता चला, तब परिवार में खुशी और राहत का मिश्रित भाव देखने को मिला। इस घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके के लोगों के बीच डॉक्टरों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुरक्षा और जिम्मेदारी पर उठे सवाल

यह घटना डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। परिजन अब अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से जवाब चाहते हैं। यह मामला मेडिकल और स्वास्थ्य विभाग के लिए चेतावनी भी है कि अस्पताल में नवजात की देखभाल और उनका सही आकलन अत्यंत महत्वपूर्ण है। चार घंटे बाद जीवित मिलने वाली यह नवजात बच्चों की सुरक्षा और डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर ध्यान दिलाती है और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती है।