MP News: आय प्रमाणपत्र में किसान की सालाना कमाई ₹3! सोशल मीडिया पर मचा बवाल, सियासत भी गरमाई

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By Sharma Published On: July 27, 2025
MP News: आय प्रमाणपत्र में किसान की सालाना कमाई ₹3! सोशल मीडिया पर मचा बवाल, सियासत भी गरमाई

MP News: मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जहां एक किसान के आय प्रमाणपत्र में उसकी सालाना कमाई सिर्फ तीन रुपये दर्शाई गई है। यह प्रमाणपत्र 22 जुलाई 2025 को कोठी तहसील के तहसीलदार सौरभ द्विवेदी द्वारा जारी किया गया था। जैसे ही यह प्रमाणपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोग किसान को देश का सबसे गरीब व्यक्ति बताने लगे।

 कांग्रेस ने साधा सरकार पर निशाना

इस घटना को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने राज्य सरकार पर करारा तंज कसा। कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई ने ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर इस प्रमाणपत्र की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि “भारत का सबसे गरीब व्यक्ति मोहनराज में मिला। सतना जिले में आय प्रमाणपत्र जारी हुआ जिसमें सालाना आय ₹03.00 लिखी गई।” कांग्रेस ने इसे ‘जनता को गरीब बनाने का मिशन’ करार दिया और सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

किसान की रोज़ाना कमाई एक पैसे से भी कम

प्रमाणपत्र के अनुसार रामस्वरूप नाम के इस किसान की मासिक आमदनी सिर्फ 25 पैसे बताई गई थी और रोज़ाना आय एक पैसे से भी कम। सोशल मीडिया पर इस आंकड़े ने लोगों को झकझोर दिया और सरकारी सिस्टम पर कई सवाल खड़े कर दिए। कई लोगों ने इसे अफसरशाही की लापरवाही बताया तो कुछ ने इसे एक क्रूर मज़ाक कहा।

तहसीलदार ने दी सफाई, बताया टाइपिंग मिस्टेक

इस पूरे मामले पर कोठी तहसील के तहसीलदार सौरभ द्विवेदी ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह महज़ एक टाइपिंग मिस्टेक था जो कर्मचारी की लापरवाही के कारण हुआ। जैसे ही गलती का पता चला उसे सुधारा गया और 25 जुलाई 2025 को नया आय प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया जिसमें किसान की सालाना आय ₹30,000 दर्शाई गई है यानी ₹2,500 प्रति माह।

 गलती छोटी थी लेकिन सवाल बड़े हैं

हालांकि तहसीलदार ने इस गलती को एक सामान्य मानवीय त्रुटि बताया है लेकिन इस मामले ने सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। यह सवाल अब ज़रूरी हो गया है कि क्या सिर्फ एक ‘क्लेरिकल एरर’ इतनी बड़ी चूक के तौर पर टाली जा सकती है जो किसी व्यक्ति की गरिमा और अधिकार पर सवाल उठा दे। सोशल मीडिया पर लोग अब प्रशासन से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।