MP News: ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्रॉस-सब्सिडी मॉडल से बनेगा मध्यप्रदेश का टिकाऊ और सस्ता आवास

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By Input Published On: February 12, 2026
MP News: ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्रॉस-सब्सिडी मॉडल से बनेगा मध्यप्रदेश का टिकाऊ और सस्ता आवास

MP News: मध्यप्रदेश में आम जनता के लिए किफायती, सुलभ और पर्यावरण-अनुकूल आवास उपलब्ध कराने के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने एक नई अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि विभाग के पास लगभग 55 लाख प्रॉपर्टी आईडी का विस्तृत डेटा मौजूद है, जिसका विश्लेषण कर वास्तविक जरूरतों के आधार पर नीति तैयार की जाएगी। भोपाल के सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में आयोजित स्टेकहोल्डर परामर्श सत्र में इस नीति पर विस्तार से चर्चा की गई और सुझावों को अंतिम मसौदे में शामिल करने का निर्देश दिया गया।

आईटी टूल्स और निजी क्षेत्र की भागीदारी से बेहतर आवास योजना

नई नीति में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए आईटी टूल्स के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा। डिजिटल मॉनिटरिंग और डेटा प्रबंधन के माध्यम से आवास योजनाओं को प्रभावी बनाने की योजना है। इसके साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए CREDAI जैसे संगठनों को जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य है कि आवास निर्माण की गति बढ़े और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो। नीति में क्रॉस-सब्सिडी मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें प्रीमियम प्रोजेक्ट्स या महंगी जमीनों से होने वाली आमदनी का उपयोग EWS और LIG के लिए किफायती मकानों के निर्माण में किया जाएगा।

MP News: ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्रॉस-सब्सिडी मॉडल से बनेगा मध्यप्रदेश का टिकाऊ और सस्ता आवास

ग्रीन टेक्नोलॉजी और टिकाऊ आवास पर जोर

नई हाउसिंग पॉलिसी में ग्रीन टेक्नोलॉजी को प्रमुख स्थान दिया गया है। इसमें सोलर ऊर्जा, ग्रीन बिल्डिंग तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, बेहतर वेंटिलेशन और पर्याप्त खुले स्थान जैसे पार्क और गार्डन शामिल होंगे। इसका उद्देश्य केवल मकान निर्माण नहीं बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित और टिकाऊ आवासीय वातावरण तैयार करना है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि शहरों के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग एफएआर तय किया जाए, ताकि सुनियोजित घनी बसाहट को बढ़ावा मिले और बुनियादी सेवाओं का प्रबंधन सरल और किफायती हो सके।

भविष्य की बढ़ती आवास जरूरत और दीर्घकालिक योजना

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक लगभग 7 लाख मकान बनाए जा चुके हैं, लेकिन अनुमान है कि 2036 तक राज्य में 40 से 50 लाख अतिरिक्त आवासों की आवश्यकता होगी। इस बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार दीर्घकालिक और समग्र हाउसिंग नीति तैयार कर रही है। नीति में EWS आवासों की बिक्री से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और पर्यावरण के अनुकूल आवास उपलब्ध कराया जा सके और राज्य में आवासीय विकास के लिए स्थायी संरचना बनाई जा सके।