MP News: चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा दावा

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By Input Published On: May 31, 2026
MP News: चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा दावा

MP News: मध्यप्रदेश के बहुचर्चित चंबल अवैध रेत खनन मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में कथित अवैध खनन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा। सरकार ने साफ कहा कि हाल ही में की गई जांच में किसी भी प्रकार के नए या ताजा अवैध रेत खनन के प्रमाण नहीं मिले हैं। सरकार की ओर से दाखिल विस्तृत हलफनामे में बताया गया कि मीडिया रिपोर्टों में जिन गड्ढों और खनन स्थलों का उल्लेख किया गया था, वे पुराने खनन गतिविधियों का परिणाम हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के बाद वहां किसी भी नए उत्खनन की पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के समक्ष हुई, जहां सरकार ने चंबल क्षेत्र में निगरानी और कार्रवाई से जुड़ी पूरी जानकारी अदालत को सौंपी।

ड्रोन निगरानी में नहीं मिला नया खनन, सरकार का दावा

मध्यप्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि ग्वालियर सर्किल के वन संरक्षक द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र के अनुसार संबंधित सभी स्थानों का भौतिक निरीक्षण किया गया। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों की मदद से लगातार निगरानी भी की गई। सरकार का कहना है कि अप्रैल 2026 के दूसरे सप्ताह से चंबल अभयारण्य और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन सर्विलांस को सक्रिय रखा गया है। इस तकनीकी निगरानी के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि अदालत के निर्देशों के बाद क्षेत्र में किसी प्रकार का नया अवैध रेत खनन नहीं हो रहा है। सरकार ने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी अवैध गतिविधि को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक और जमीनी स्तर की निगरानी दोनों को और मजबूत किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि अब पूरे इलाके पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि पर्यावरण और वन्यजीवों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।

अवैध परिवहन पर कार्रवाई, 12 गिरफ्तार और 44 वाहन जब्त

सुनवाई के दौरान सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ ट्रैक्टरों और वाहनों में जो रेत परिवहन करते हुए पाई गई थी, वह संभवतः पहले से डंप की गई सामग्री हो सकती है। हालांकि सरकार ने माना कि अवैध भंडारण और बिना अनुमति परिवहन के मामलों में कार्रवाई लगातार जारी है। अदालत को बताया गया कि अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा 44 वाहनों को जब्त किया गया है और 8 वाहनों को राजसात करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ये आंकड़े सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान की गंभीरता को दर्शाते हैं। प्रशासन का कहना है कि अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में किसी प्रकार की ढील नहीं बरती जा रही है। चंबल क्षेत्र में खनन माफियाओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों को पूरी तरह रोका जा सके।

22 जुलाई को होगी अगली सुनवाई, कोर्ट की नजर पूरे मामले पर

मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि चंबल अभयारण्य में निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वन विभाग, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही हैं। गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार से विस्तृत जवाब मांगा था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद चंबल क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन जारी है। अदालत ने पहले भी टिप्पणी की थी कि चंबल में अवैध खनन का नेटवर्क संगठित रूप ले चुका है और इसे गंभीरता से रोकना जरूरी है। अब सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति से ताजा रिपोर्ट मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को होगी, जहां यह परखा जाएगा कि सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है तथा अवैध रेत खनन पर वास्तव में कितनी प्रभावी रोक लग पाई है।