MP News: महिला सशक्तिकरण बिल गिरने पर मोहन यादव का कांग्रेस पर बड़ा हमला

Author Picture
By Input Published On: April 18, 2026
MP News: महिला सशक्तिकरण बिल गिरने पर मोहन यादव का कांग्रेस पर बड़ा हमला

MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संसद में महिला सशक्तिकरण से जुड़े विधेयक के पारित न होने को लेकर कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी करते हुए कांग्रेस की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। सीएम यादव ने कहा कि यह घटना कांग्रेस की महिला विरोधी मानसिकता को एक बार फिर उजागर करती है, जो अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, यह विधेयक देश की महिलाओं के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसे पारित न होने देना चिंता का विषय है।

महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति को बताया अनुचित

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि महिलाओं के सशक्तिकरण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देश की माताओं और बहनों के सम्मान से जुड़ा विषय है, जिस पर किसी भी प्रकार की राजनीतिक खींचतान उचित नहीं है। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि जनता पूरी स्थिति को देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी। इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है, क्योंकि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

लोकसभा में वोटिंग और विधेयक गिरने की पूरी स्थिति

लोकसभा में महिला सशक्तिकरण विधेयक पर हुई वोटिंग के दौरान कुल 528 सांसद मौजूद थे। इनमें से 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में वोट किया जबकि 230 ने विरोध में मतदान किया। विधेयक को पारित होने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी, लेकिन यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका और बिल 54 वोटों से गिर गया। सरकार इस दौरान तीन संबंधित विधेयक लेकर आई थी, लेकिन पहले बिल के गिरने के बाद बाकी दो पर मतदान नहीं कराया गया क्योंकि सभी प्रस्ताव एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।

परिसीमन विवाद और विपक्ष की आपत्ति से बढ़ा सियासी तनाव

इस पूरे मामले में विपक्ष की मुख्य आपत्ति परिसीमन और लोकसभा सीटों के पुनर्गठन को लेकर है। सरकार द्वारा प्रस्तावित योजना में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की बात कही गई थी, जिस पर विपक्षी दलों ने असहमति जताई। विपक्ष का कहना है कि परिसीमन के लिए अलग और पारदर्शी मानदंड अपनाए जाने चाहिए। वहीं सरकार का तर्क है कि यह प्रक्रिया महिलाओं के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। 2023 में महिला आरक्षण से जुड़ा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर अभी भी राजनीतिक टकराव जारी है।