MP News: अगर मालवा में संतरे की कीमतें बढ़ीं लेकिन किसानों को पूरी राहत नहीं मिली

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By Input Published On: March 14, 2026
MP News: अगर मालवा में संतरे की कीमतें बढ़ीं लेकिन किसानों को पूरी राहत नहीं मिली

MP News: मध्यप्रदेश के अगर मालवा जिले में इस साल की संतरे की फसल ने किसानों के चेहरे पर थोड़ी राहत ला दी है। पिछले कई सालों से किसान बाजार में संतरे की कम कीमतों के चलते घाटे में थे, लेकिन इस बार बाजार में संतरे की कीमतें 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। हालांकि, उत्पादन की मात्रा अपेक्षित से कम रहने के कारण किसान पूरी तरह से लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

अगर मालवा में संतरे की खेती और कीमतों का हाल

अगर मालवा जिले में संतरे की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। पिछले कई सालों में किसानों को संतरे के लिए मात्र 25 से 30 रुपये प्रति किलो मिलते थे, जो उनकी उत्पादन लागत barely कवर करती थी। इस साल कीमतों में तेजी आई है और संतरे अब 60 से 70 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार, असामयिक बारिश, अत्यधिक गर्मी और गर्मी का जल्दी आगमन संतरे के जल्दी पकने का कारण बना, जिससे कुल उत्पादन कम हुआ। दूसरी ओर, रमजान और होली जैसे त्योहारों की वजह से बाजार में संतरे की मांग बढ़ी और कीमतों में तेजी आई।

मजदूरों की चिंता बढ़ी

जिले में विभिन्न स्थानों पर संतरे के मंडी केंद्र बनाए गए हैं, जहां से यह फसल देश के अलग-अलग राज्यों और पड़ोसी देशों में भेजी जा रही है। हर साल संतरे के मौसम में महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में मजदूर यहां आते हैं। ये मजदूर खेतों से संतरे की कटाई करते हैं और मंडियों में इसके ग्रेडिंग और पैकिंग का काम संभालते हैं। लेकिन इस साल फसल जल्दी पकने और मौसम के पहले खत्म होने की वजह से मजदूरों के लिए काम कम हो गया है। आमतौर पर यह मौसमी रोजगार तीन महीने तक रहता था, लेकिन इस बार पूरे काम का समय केवल डेढ़ महीने तक ही सीमित रहा।

बढ़ी कीमतों से मिली थोड़ी राहत

कुल मिलाकर, इस सीजन में बढ़ी संतरे की कीमतों ने किसानों को निश्चित रूप से कुछ राहत दी है, लेकिन कम उत्पादन और सीजन के संक्षिप्त होने से उनका लाभ सीमित रहा। किसान अब उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले मौसम में बेहतर उत्पादन से उन्हें और अधिक मुनाफा मिलेगा। वर्तमान में जिले में कई स्थानों पर संतरे की मंडियां संचालित हैं, जहां से यह फसल देश के विभिन्न राज्यों और पड़ोसी देशों में वितरित की जा रही है। महाराष्ट्र से आए मजदूर हर साल कटाई, ग्रेडिंग और पैकिंग के काम में मदद करते हैं, जो इस साल कम समय में पूरा होना पड़ा।