MP News: रतलाम में पटवारी की आत्महत्या, सुसाइड नोट ने खोले चौंकाने वाले राज

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By Input Published On: April 22, 2026
MP News: रतलाम में पटवारी की आत्महत्या, सुसाइड नोट ने खोले चौंकाने वाले राज

MP News: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। आलोट में पदस्थ पटवारी रविशंकर खराड़ी ने अपने रतलाम स्थित घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और बंद कमरे का दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। इस घटना के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है और हर कोई इस अचानक उठे कदम के पीछे की वजह जानने की कोशिश कर रहा है।

परिजनों ने नायब तहसीलदार पर लगाए गंभीर आरोप

इस मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब मृतक के परिजनों ने नायब तहसीलदार पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए। मृतक की मां ने कहा कि उनके बेटे पर लगातार काम का दबाव बनाया जा रहा था। उनका आरोप है कि एक किसान का काम कराने के लिए उस पर दबाव डाला जा रहा था और जब वह काम समय पर पूरा नहीं कर पाया तो उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया। परिजनों का कहना है कि इसी दबाव के चलते रविशंकर ने यह कदम उठाया। इस आरोप के सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

सुसाइड नोट ने खोले कई अहम राज

घटनास्थल से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है जो इस मामले को और संवेदनशील बना रहा है। इस नोट में रविशंकर ने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा कि छोटे भाई की शादी के चलते वह घर के कामों में व्यस्त थे लेकिन इसके बावजूद उन पर लगातार काम का दबाव बनाया जा रहा था। इस सुसाइड नोट से यह साफ होता है कि वह मानसिक रूप से काफी परेशान थे। अब पुलिस इस नोट के आधार पर पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पुलिस जांच में जुटी, न्याय की उम्मीद

इस पूरे मामले को लेकर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया के अनुसार पुलिस ने घटनास्थल से सुसाइड नोट और अन्य जरूरी साक्ष्य जब्त किए हैं और हर पहलू की जांच की जा रही है। प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है। यह घटना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि मानसिक दबाव और जिम्मेदारियों के बीच फंसा व्यक्ति किस हद तक टूट सकता है।