MP News: बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में माओवादी सरेंडर से खत्म हुआ आतंक का दौर

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By Input Published On: March 19, 2026
MP News: बालाघाट, मंडला और डिंडौरी में माओवादी सरेंडर से खत्म हुआ आतंक का दौर

MP News: मध्यप्रदेश के बालाघाट, मंडला और डिंडौरी के घने जंगलों में वर्षों तक माओवादी खौफ रहा। दिन हो या रात, गांवों की पगडंडियां हों या शहर की सड़के, पुलिसकर्मी हों या आमजन, हर किसी के सिर पर एक ही डर मंडराता था कि कहीं माओवादियों का निशाना न बन जाए। 1988 से 1990 के बीच माओवादी समस्या ने अपने पैर जमाए और करीब चार दशकों तक विकास और जनजीवन में अवरोध पैदा किया। खौफ के कारण आम जनता का जीवन असुरक्षित रहा और प्रशासन को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा।

सरकारी कार्रवाई और शांति की शुरुआत

आशा की किरण उस समय जगी जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक देशभर से माओवादी समस्या का अंत कर दिया जाएगा। मध्यप्रदेश पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। घेराबंदी और सघन तलाशी अभियान के चलते माओवादियों के विकल्प सीमित हो गए। उन्हें या तो हथियार डालने पड़े या मार दिया गया। इसके चलते धीरे-धीरे प्रदेश में शांति का वातावरण लौटना शुरू हुआ। 10 दिसंबर की रात दो बचे हुए माओवादियों के सरेंडर के साथ मध्यप्रदेश के गांवों और शहरों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई।

भयानक घटनाओं का इतिहास

मध्यप्रदेश में माओवादी गतिविधियों का इतिहास दर्दनाक रहा है। वर्ष 1991 में बालाघाट के लांजी थाना क्षेत्र में माओवादियों ने पुलिस वाहन को बारूदी सुरंग से उड़ा दिया, जिसमें नौ पुलिसकर्मी शहीद हुए। उसी क्षेत्र के रूपझर थाना में नारंगी गांव में बारूदी सुरंग विस्फोट से 16 पुलिसकर्मी मारे गए। 1999 में तत्कालीन परिवहन मंत्री लिखिराम कांवरे को माओवादी सक्रियताओं के दौरान घर से अगवा कर चौराहे पर हत्या कर दी गई। इन घटनाओं ने आम जनता और प्रशासन दोनों में दहशत पैदा कर दी थी। बीते 35 वर्षों में माओवादी हिंसा में 57 आमजन और 38 पुलिसकर्मी अपनी जान गंवा चुके हैं।

मध्यप्रदेश में अब सामान्य जीवन और आगे की चुनौतियां

मध्यप्रदेश में अब हालात सामान्य हो गए हैं और राज्य में माओवादियों की गतिविधियां समाप्त होती दिख रही हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में माओवादी अब भी सक्रिय हैं। प्रशासन ने 31 मार्च 2026 तक सभी माओवादी तत्वों को समाप्त करने के लक्ष्य के साथ तैयारी पूरी कर ली है। इस ऐतिहासिक सफाई के बाद क्षेत्र में विकास और निवेश की राह आसान होगी। आम जनता अब बिना डर के अपने गांवों और शहरों में जीवन यापन कर सकती है। माओवादी समस्या का यह अंत मध्यप्रदेश के लिए सुरक्षा और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।