MP News: ग्वालियर कोर्ट में हैरान करने वाला फैसला युवती को प्रेमी संग रहने की मिली इजाजत

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By Input Published On: April 6, 2026
MP News: ग्वालियर कोर्ट में हैरान करने वाला फैसला युवती को प्रेमी संग रहने की मिली इजाजत

MP News: मध्य प्रदेश के Gwalior खंडपीठ में हैबियस कॉर्पस याचिका पर एक अनोखी सुनवाई हुई। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब एक 19 साल की युवती को अदालत में पेश किया गया। उसके पति ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी को उसके प्रेमी के साथ अवैध रूप से रखा गया है। सुनवाई के दौरान पुलिस की मौजूदगी में युवती को अदालत के सामने लाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में युवती के माता पिता पति और प्रेमी भी उपस्थित रहे। यह पूरा घटनाक्रम एक संवेदनशील कानूनी और सामाजिक स्थिति को दर्शाता है।

युवती की इच्छा और अदालत के सामने बयान

सुनवाई के दौरान युवती ने स्पष्ट रूप से अदालत को बताया कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। उसने कहा कि वह अपने प्रेमी अनुज के साथ रहना चाहती है और अपने पति तथा माता पिता के साथ नहीं रहना चाहती। युवती ने यह भी कहा कि उसके पति और उसके बीच उम्र का बड़ा अंतर है। दोनों के बीच 21 साल का अंतर होने के कारण तालमेल नहीं बैठ पाया। उसने अपने पति पर गलत व्यवहार करने के भी आरोप लगाए। अदालत ने युवती के बयान को गंभीरता से सुना और उसकी इच्छा को प्राथमिकता दी।

काउंसलिंग के बावजूद निर्णय पर कायम रही युवती

कोर्ट के निर्देश पर युवती की काउंसलिंग कराई गई ताकि उसे समझाया जा सके और उसके भविष्य को लेकर संतुलित निर्णय लिया जा सके। काउंसलिंग के दौरान उसे परिवार के साथ रहने के विकल्प पर विचार करने के लिए प्रेरित किया गया। हालांकि युवती अपने निर्णय पर अडिग रही और उसने स्पष्ट किया कि वह अपने प्रेमी के साथ ही रहना चाहती है। उसके प्रेमी अनुज ने भी अदालत में भरोसा दिलाया कि वह उसका पूरा ध्यान रखेगा और किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देगा। इस पूरे घटनाक्रम ने अदालत को यह समझने में मदद की कि युवती अपनी इच्छा से ही यह निर्णय ले रही है।

कोर्ट का फैसला और सुरक्षा के निर्देश

अंत में High Court of Madhya Pradesh ने इस याचिका की प्रकृति को देखते हुए अपना फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि इस याचिका का उद्देश्य अब समाप्त हो चुका है क्योंकि युवती ने स्वयं अपनी इच्छा स्पष्ट कर दी है। इसके बाद अदालत ने युवती को उसके प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दे दी। साथ ही उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे शौर्य दीदी सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए गए। इसके तहत दो पुलिसकर्मी छह महीने तक उसकी सुरक्षा में तैनात रहेंगे और आवश्यकता पड़ने पर उसे हर संभव सहायता प्रदान करेंगे। यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों को संतुलित करने वाला माना जा रहा है।