MP News: सूर्योदय आधारित वैदिक घड़ी ने GMT को दी चुनौती बढ़ी देशभर में चर्चा

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By Input Published On: April 29, 2026
MP News: सूर्योदय आधारित वैदिक घड़ी ने GMT को दी चुनौती बढ़ी देशभर में चर्चा

MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सपना अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी धीरे धीरे अपनी खासियत और परंपरा के कारण लोगों को आकर्षित कर रही है। यह घड़ी सिर्फ समय बताने का साधन नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति और वैदिक ज्ञान का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी है। आम जनता से लेकर बड़े नेता तक इस घड़ी को देखने और समझने में रुचि दिखा रहे हैं। यह पहल उज्जैन को एक बार फिर ऐतिहासिक और वैज्ञानिक पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

काशी विश्वनाथ में पीएम मोदी ने किया अवलोकन बढ़ी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में इस वैदिक घड़ी का अवलोकन किया। उन्होंने न केवल इस घड़ी को करीब से देखा बल्कि इसकी कार्यप्रणाली को भी विस्तार से समझा। यह घड़ी कुछ महीने पहले ही मंदिर परिसर में स्थापित की गई थी और इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव ने योगी आदित्यनाथ को भेंट किया था। प्रधानमंत्री के इस निरीक्षण के बाद इस घड़ी की चर्चा देशभर में और तेज हो गई है और लोग इसके पीछे की तकनीक और परंपरा को जानने के लिए उत्सुक हो रहे हैं।

वैदिक गणना पर आधारित अनोखी तकनीक से चलती है यह घड़ी

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसकी समय गणना की अलग पद्धति है। यह घड़ी सामान्य घंटे और मिनट के आधार पर नहीं चलती बल्कि सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय को आधार मानती है। इसके साथ ही यह घड़ी पंचांग मुहूर्त ग्रहों की स्थिति और अन्य खगोलीय जानकारी भी प्रदान करती है। इस घड़ी को महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के विद्वानों ने तैयार किया है। इससे पहले इसे महाकालेश्वर मंदिर में स्थापित किया गया था जहां से इसकी यात्रा शुरू हुई और अब यह देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंच रही है।

उज्जैन को प्राइम मेरिडियन बनाने की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री मोहन यादव उज्जैन को दुनिया के प्राइम मेरिडियन के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि ग्रीनविच मीन टाइम पश्चिमी प्रणाली पर आधारित है जो भारतीय परंपरा से मेल नहीं खाती। वैदिक घड़ी का उद्देश्य भारतीय कालगणना को पुनर्जीवित करना और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण खगोलीय रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यह पहल भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को दुनिया के सामने नई पहचान दिलाने का माध्यम बन सकती है।