MP News: बाढ़ राहत घोटाले में अमिता सिंह तोमर की अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

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By Input Published On: March 19, 2026
MP News: बाढ़ राहत घोटाले में अमिता सिंह तोमर की अग्रिम जमानत सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

MP News: मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले में विजयपुर तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले ग्वालियर हाई कोर्ट भी उनकी याचिका खारिज कर चुकी थी। अब या तो उन्हें स्वेच्छा से सरेंडर करना होगा या बड़ौदा थाने की पुलिस कभी भी उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और राजस्व अमले में भी सक्रियता बढ़ गई है।

2.57 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला

साल 2021 में श्योपुर जिले में आई बाढ़ के बाद पीड़ितों के लिए राहत राशि का वितरण किया गया था। आरोप है कि बड़ौदा तहसील में पदस्थ तहसीलदार अमिता सिंह तोमर ने करीब 25 पटवारियों और 100 से ज्यादा दलालों के साथ मिलकर 127 फर्जी खातों में लगभग 2.57 करोड़ रुपये की राशि बांट दी। जांच में यह आरोप सामने आया कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को बाढ़ पीड़ित दिखाकर उनके खातों में रकम डलवाई। यह गड़बड़ी डिप्टी कलेक्टर की ऑडिट में पकड़ में आई। इसके बाद बड़ौदा थाने में FIR दर्ज कराई गई और पुलिस जांच में 100 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया।

हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लंबी लड़ाई

अमिता सिंह तोमर ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले ग्वालियर हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में SLP के साथ अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई। हालांकि, 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी। अब बड़ौदा थाने की पुलिस कभी भी उनकी गिरफ्तारी कर सकती है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक विभाग में हड़कंप मच गया और राजस्व अमले की सक्रियता बढ़ गई।

विवादों से पुराना नाता और पिछली घटनाएं

अमिता सिंह तोमर साल 2011 में केबीसी के पांचवें सीजन में 50 लाख रुपये जीतकर सुर्खियों में आई थीं। इसके बाद से वह लगातार विवादों में रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट और कमेंट कर प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती दी। इसके कारण उन्हें निलंबित भी किया गया। बार-बार तबादलों और तहसील का प्रभार न मिलने पर वह PM मोदी को पत्र भी लिख चुकी हैं। साल 2023 में तहसील का प्रभार नहीं मिलने पर उन्होंने इस्तीफे का पत्र भी भेजा था। इस पुरानी पृष्ठभूमि ने उनके मामले को और संवेदनशील बना दिया है।