MP News: मिलावटखोरी पर कमजोर कार्रवाई से बढ़ा खतरा ICMR रिपोर्ट ने किया अलर्ट

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By Input Published On: April 18, 2026
MP News: मिलावटखोरी पर कमजोर कार्रवाई से बढ़ा खतरा ICMR रिपोर्ट ने किया अलर्ट

MP News: मध्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को लेकर चौंकाने वाले सरकारी आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। साल भर के भीतर राज्य में करीब 13 हजार 920 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए गए, जिनमें से 1635 नमूने अमानक या मिलावटी पाए गए। इसका मतलब है कि हर आठवां खाद्य सैंपल गुणवत्ता की कसौटी पर खरा नहीं उतर रहा। यह स्थिति सीधे तौर पर आम जनता की सेहत के लिए गंभीर खतरे की ओर इशारा करती है, क्योंकि यही मिलावटी खाद्य पदार्थ रोजमर्रा की थाली तक पहुंच रहे हैं।

मिलावटखोरी पर कमजोर कार्रवाई से बढ़ता खतरा

सबसे चिंता की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में नमूने फेल होने के बावजूद कार्रवाई बेहद सीमित रही है। रिपोर्ट के अनुसार 1600 से ज्यादा फेल सैंपलों के मामलों में केवल 22 मामलों में ही आपराधिक केस दर्ज किए गए हैं। इससे साफ है कि मिलावटखोरों पर कानूनी शिकंजा बहुत कमजोर है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह “धीमा जहर” आम लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाता रहेगा। बाजार में बिकने वाले कई खाद्य पदार्थ बिना पर्याप्त जांच के उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे हैं, जिससे सिस्टम की लापरवाही उजागर होती है।

आईसीएमआर की चेतावनी से बढ़ी स्वास्थ्य संकट की चिंता

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्ट ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अध्ययन के अनुसार भारतीय आहार में प्रोटीन की कमी लगातार बढ़ रही है और उसकी जगह रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और शर्करा ले रही है। देश में किए गए 18 हजार से अधिक लोगों के खान-पान विश्लेषण से पता चला है कि लोग अपनी कुल कैलोरी का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा केवल चावल, गेहूं और चीनी जैसे कम गुणवत्ता वाले कार्ब्स से प्राप्त कर रहे हैं। यह असंतुलित आहार सीधे तौर पर डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोगों के खतरे को तेजी से बढ़ा रहा है।

सैंपल जांच में गिरावट और भविष्य की चिंता

पिछले तीन वर्षों से राज्य में खाद्य सैंपल जांच की संख्या लगातार घट रही है, जो और भी चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। वर्ष 2021-22 में 16059 सैंपल में 2900 फेल पाए गए थे, जबकि इसके बाद जांच की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई। 2023-24 में 13998 सैंपल, 2024-25 में 13920 सैंपल और 2025-26 में यह संख्या घटकर 8236 रह गई। इसी अवधि में फेल सैंपलों की संख्या भी बदलती रही, लेकिन सैंपलिंग में कमी यह संकेत देती है कि निगरानी प्रणाली कमजोर हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और अधिक गंभीर संकट में पड़ सकती है।