MP News: तीन दिवसीय गिद्ध जनगणना में खुलासा, रायसेन जिले में सबसे ज्यादा गिद्ध पाए गए

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By Input Published On: February 26, 2026
MP News: तीन दिवसीय गिद्ध जनगणना में खुलासा, रायसेन जिले में सबसे ज्यादा गिद्ध पाए गए

MP News: मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। राज्य में बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्य जीवों के बाद अब गिद्धों की संख्या सबसे ज्यादा पाई गई है। 20 से 22 फरवरी तक आयोजित तीन दिवसीय गिद्ध जनगणना में यह खुलासा हुआ कि मध्य प्रदेश में अब गिद्धों की संख्या 13,500 से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा पिछले साल 12,710 गिद्धों से भी अधिक है। राज्य में गिद्धों की बढ़ती संख्या ने इसे “गिद्ध राज्य” के रूप में एक बार फिर मान्यता दिलाई है।

गिद्धों की विभिन्न प्रजातियाँ और उनका आवास

जनगणना में सात प्रकार की गिद्ध प्रजातियाँ पाई गई हैं। इनमें भारतीय लंबे बिल वाले गिद्ध, लाल सिर वाला गिद्ध, मिस्र का गिद्ध, यूरेशियन ग्रिफ़ॉन और हिमालयन ग्रिफ़ॉन शामिल हैं। इन प्रजातियों में स्थानीय और प्रवासी दोनों गिद्ध शामिल हैं। ये गिद्ध मुख्यतः जंगलों, चट्टानों और खुले मैदानों में रहते हैं। रायसेन जिले में सबसे ज्यादा 1,532 गिद्ध पाए गए, वहीं पवई रेंज में 900 से अधिक और गांधी सागर में 700 से अधिक गिद्धों की गणना की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि उपयुक्त आवास, संरक्षित इलाकों, भोजन की प्रचुरता और संरक्षण उपायों की वजह से गिद्धों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

MP News: तीन दिवसीय गिद्ध जनगणना में खुलासा, रायसेन जिले में सबसे ज्यादा गिद्ध पाए गए

गिद्धों का पर्यावरण में महत्व

गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी माने जाते हैं। ये मृत जानवरों के शवों को खाकर पर्यावरण को साफ और रोगमुक्त रखते हैं। गिद्धों की बढ़ती संख्या से न केवल पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है, बल्कि बीमारियों के फैलाव की संभावना भी कम होती है। भोपाल के केरवा डैम में 2014 से गिद्ध प्रजनन केंद्र संचालित हो रहा है, जो युवा गिद्धों के संरक्षण और बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाता है। रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र को भी गिद्धों के लिए आदर्श माना जाता है और इसे ‘गिद्धगढ़’ के नाम से जाना जाता है।

संरक्षण प्रयास और भविष्य की योजनाएँ

मध्य प्रदेश में गिद्धों की पहली जनगणना 2016 में की गई थी, उस समय गिद्धों की संख्या केवल 7,028 थी। पिछले आठ वर्षों में संख्या में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार के संरक्षण प्रयास, सुरक्षित क्षेत्रों का निर्माण और भोजन की उपलब्धता गिद्धों की बढ़ती आबादी के लिए सहायक हैं। भविष्य में और अधिक गिद्ध प्रजनन केंद्र स्थापित करने और स्थानीय लोगों में जागरूकता बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। इससे गिद्धों की संख्या और उनके पर्यावरणीय महत्व को बनाए रखना संभव होगा।