MP Police Training: अब MP पुलिस में भी ‘कटप्पा’ जैसी फुर्ती! जानिए कैसे बदल रही है MP पुलिस ट्रेनिंग की तस्वीर

Author Picture
By Sharma Published On: July 8, 2025
MP Police Training: अब MP पुलिस में भी ‘कटप्पा’ जैसी फुर्ती! जानिए कैसे बदल रही है MP पुलिस ट्रेनिंग की तस्वीर

MP Police Training: बाहुबली फिल्म के कटप्पा की तरह अब मध्यप्रदेश पुलिस के जवान भी हवा में कूदकर दुश्मनों पर वार करना सीख रहे हैं। इसकी वजह है भारत की सबसे पुरानी और प्रभावशाली युद्धकला ‘कलारीपयट्टु’ जिसे अब पुलिस ट्रेनिंग का हिस्सा बना लिया गया है। पुलिस विभाग की ट्रेनिंग शाखा ने पारंपरिक भारतीय युद्ध कलाओं को फिर से जीवित करते हुए उन्हें जवानों की शारीरिक और मानसिक क्षमता बढ़ाने के लिए शामिल किया है।

सिर्फ मार्शल आर्ट नहीं, आत्मविश्वास भी बढ़ेगा

पुलिस जवानों को अब न केवल आधुनिक हथियारों का प्रयोग सिखाया जा रहा है बल्कि पारंपरिक कला के जरिए आत्मविश्वास, अनुशासन और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति भी दी जा रही है। ट्रेनिंग के दौरान जवानों का शरीर अधिक लचीला बनता है जिससे वे कठिन परिस्थितियों में भी आसानी से मुकाबला कर सकते हैं। यह पहल उन्हें मानसिक रूप से भी मजबूत बना रही है।

MP Police Training: अब MP पुलिस में भी ‘कटप्पा’ जैसी फुर्ती! जानिए कैसे बदल रही है MP पुलिस ट्रेनिंग की तस्वीर

प्रदेशभर के PTS में अलग-अलग युद्धकला की ट्रेनिंग

सागर PTS में जहां केरल की कलारीपयट्टु सिखाई जा रही है, वहीं भोपाल के भौरी PTS में बंगाल की लाठी खेला दी जा रही है। इसी तरह, रीवा में पारंपरिक लाठी, तिघरा में ताइक्वांडो, इंदौर में वुशू, उज्जैन में लाठी तलवार, पचमढ़ी में भी कलारीपयट्टु और उमरिया में लाठी कर्रासामु की ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे प्रदेश के हर हिस्से के पुलिस जवान किसी न किसी रूप में पारंपरिक युद्धकला में निपुण बनेंगे।

देश के सर्टिफाइड ट्रेनर देंगे खास प्रशिक्षण

पुलिस विभाग ने देश के विभिन्न राज्यों से प्रमाणित ट्रेनरों की नियुक्ति की है जो इन पारंपरिक युद्धकलाओं में विशेषज्ञ हैं। प्रत्येक PTS में एक मास्टर ट्रेनर तैयार किया जाएगा जो अन्य जवानों को भी प्रशिक्षित करेगा। इस पहल से जहां एक ओर भारतीय संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा वहीं पुलिस की दक्षता और चुस्ती भी बढ़ेगी।

आत्मनिर्भर और परंपरागत ज्ञान से सुसज्जित होगी पुलिस

ADG ट्रेनिंग राजबाबू सिंह ने बताया कि पहले पुलिस की ट्रेनिंग में केवल वेस्टर्न तरीकों को अपनाया जाता था लेकिन अब हम स्वदेशी कौशल और परंपराओं को भी प्रमुखता दे रहे हैं। इस कदम से जवान शारीरिक रूप से और अधिक फुर्तीले बनेंगे और मानसिक रूप से भी तैयार रहेंगे। ऐसे प्रशिक्षण से पुलिस बल आत्मनिर्भर बनेगा और हर परिस्थिति में बेहतर प्रदर्शन करेगा।