Raja Raghuvanshi Case Indore: रघुवंशी हत्याकांड में नया खुलासा परिवार ने लगाए गंभीर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप

Author Picture
By Input Published On: April 29, 2026
Raja Raghuvanshi Case Indore: रघुवंशी हत्याकांड में नया खुलासा परिवार ने लगाए गंभीर राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप

Raja Raghuvanshi Case Indore: बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। इस मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को सशर्त जमानत मिलने के बाद अब दूसरे आरोपी राज कुशवाहा की जमानत याचिका पर आज शिलांग कोर्ट में सुनवाई होनी है। जैसे ही यह मामला अदालत के दरवाजे तक पहुंचा, वैसे ही पीड़ित परिवार ने कड़ा रुख अपनाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। इससे पूरे केस में नया तनाव पैदा हो गया है।

परिवार का आरोप सोनम के परिजन कर रहे हैं कानूनी मदद का प्रयास

मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने आरोप लगाया है कि सोनम रघुवंशी के मायके पक्ष का इस पूरे केस में प्रभाव लगातार बना हुआ है। उनका दावा है कि सोनम के पिता और भाई गोविंद न केवल सोनम को बचाने में सक्रिय रहे बल्कि अब राज कुशवाहा की जमानत दिलाने के प्रयास में भी लगे हैं। विपिन का कहना है कि यह सब मिलकर न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है और कोर्ट में आरोपियों की मदद की जा रही है। उनके अनुसार यह मामला सिर्फ अपराध का नहीं बल्कि सिस्टम पर भरोसे का भी है।

सोनम के भाई गोविंद का पलटवार अब नहीं करेंगे परिवार की मदद

इन आरोपों के बीच सोनम के भाई गोविंद रघुवंशी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वे अब इन विवादों से पूरी तरह तंग आ चुके हैं और खुद को इससे अलग कर रहे हैं। गोविंद ने कहा कि उन्होंने पहले राजा के परिवार की मदद की थी लेकिन अब उन्हें ही दोषी ठहराया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि उनका सोनम से कोई संबंध नहीं है और अगर वह घर आती है तो वह खुद वहां से चले जाएंगे। उनके इस बयान ने मामले को और भी जटिल बना दिया है।

शिलांग कोर्ट में आज अहम सुनवाई केस की दिशा तय कर सकता है फैसला

इस पूरे मामले की जड़ में राजा रघुवंशी हत्याकांड की दर्दनाक घटना है जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। आरोप है कि सोनम और राज कुशवाहा ने मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी जिसमें प्रेम प्रसंग की परतें भी सामने आई थीं। अब जबकि सोनम को राहत मिल चुकी है, राज कुशवाहा की जमानत पर होने वाली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। अभियोजन पक्ष जमानत का विरोध कर सकता है जबकि बचाव पक्ष पहले मिले फैसले को आधार बनाएगा। अदालत का यह फैसला पूरे केस की दिशा तय कर सकता है।