Randhir Jaiswal: ट्रंप के बयान से मचा बवाल! भारत ने अमेरिका को सुनाया कड़ा जवाब, रिश्तों में दिखा नया मोड़

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By Sharma Published On: August 1, 2025
Randhir Jaiswal: ट्रंप के बयान से मचा बवाल! भारत ने अमेरिका को सुनाया कड़ा जवाब, रिश्तों में दिखा नया मोड़

Randhir Jaiswal: विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत और अमेरिका तथा रूस के साथ संबंधों पर खुलकर चर्चा की गई। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत की आलोचना और 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी समय-समय पर बदलाव और चुनौतियों से गुज़री है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के बयानों के बावजूद, भारत-अमेरिका संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा हितों और जनता से जनता के मजबूत संबंधों पर आधारित हैं।

रूस के साथ संबंध मज़बूत और समय की कसौटी पर खरे

अमेरिका द्वारा भारत की रूस से तेल खरीद पर आपत्ति जताने के जवाब में रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के किसी भी देश के साथ संबंध उस देश के गुणों के आधार पर होते हैं और उन्हें किसी तीसरे देश की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत-रूस के संबंध स्थिर हैं और समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। यह साझेदारी वर्षों से चली आ रही है और वैश्विक परिस्थितियों में भी स्थिर बनी हुई है। रूस से तेल खरीद पर उन्होंने कहा कि यह भारत के राष्ट्रीय हितों द्वारा संचालित निर्णय है।

अमेरिका के साथ रक्षा संबंध हो रहे मजबूत

रंधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध लगातार मज़बूत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है जो साझा हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। यह साझेदारी तकनीकी सहयोग, व्यापार, शिक्षा, और रक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हम अमेरिका के साथ एक ठोस एजेंडे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसमें दोनों देशों की भागीदारी निरंतर बनी हुई है।

ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए रूस से तेल खरीद राष्ट्रहित में

भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं पर बोलते हुए प्रवक्ता ने कहा कि भारत वैश्विक बाज़ार और भू-राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अपने ऊर्जा संसाधनों का प्रबंधन करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस से तेल खरीद पूरी तरह से भारत के राष्ट्रीय हितों से प्रेरित है और यह हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत वैश्विक स्थिरता और आर्थिक संतुलन को बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाता है और अपने निर्णयों में स्वतंत्र और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाता है।