Rath Yatra In Ujjain: शाही मस्जिद पर गिरी चप्पलें, रथ यात्रा बनी तनाव की वजह, पुलिस CCTV से ढूंढ रही साजिशकर्ता

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By Sharma Published On: June 28, 2025
Rath Yatra In Ujjain: शाही मस्जिद पर गिरी चप्पलें, रथ यात्रा बनी तनाव की वजह, पुलिस CCTV से ढूंढ रही साजिशकर्ता

Rath Yatra In Ujjain: उज्जैन को धार्मिक सौहार्द और सहिष्णुता के लिए जाना जाता है जहां हर त्योहार मिलजुल कर मनाया जाता है। लेकिन शुक्रवार रात एक घटना ने इस छवि पर सवाल खड़ा कर दिया। शहर में निकाली जा रही खाती समाज की पारंपरिक जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान जब जुलूस छत्री चौक पहुंचा तो कुछ लोगों ने शाही मस्जिद की ओर चप्पल और जूते फेंक दिए। यह घटना कैमरे में कैद हो गई और जब इसका वीडियो वायरल हुआ तो तनाव फैल गया।

 मुस्लिम समुदाय में गुस्सा

वीडियो सामने आते ही मुस्लिम समुदाय के लोग देर रात खरकुआं थाने पहुंचे और कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध जताया। समुदाय के लोगों ने स्पष्ट कहा कि यह घटना उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है और इसके दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया और अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की। हालांकि अभी तक किसी की पहचान नहीं हो पाई है।

Rath Yatra In Ujjain: शाही मस्जिद पर गिरी चप्पलें, रथ यात्रा बनी तनाव की वजह, पुलिस CCTV से ढूंढ रही साजिशकर्ता

 पुलिस का ऐक्शन और आश्वासन

खरकुआं थाना प्रभारी राजकुमार मालवीय ने बताया कि फिलहाल अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 299 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है और छत्री चौक के आसपास लगे कैमरों की मदद से आरोपियों की पहचान की कोशिश की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसा दोबारा न हो।

धार्मिक माहौल को बनाए रखने की चुनौती

पुलिस इस घटना को लेकर बेहद सतर्क हो गई है क्योंकि एक तरफ मुस्लिम समुदाय का मोहर्रम और बोहरा समाज का पर्व चल रहा है वहीं दूसरी ओर सावन मास की शुरुआत भी हो रही है। बाबा महाकाल की सवारी भी इसी मार्ग से निकलती है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि दोनों समुदायों के बीच तनाव न बढ़े और शहर की शांति बनी रहे। पुलिस प्रशासन हर स्तर पर सख्ती से काम कर रहा है ताकि माहौल को संभाला जा सके।

क्या सीख मिलती है इस घटना से

यह घटना न केवल उज्जैन बल्कि पूरे देश को एक चेतावनी देती है कि धार्मिक आयोजनों में अनुशासन और सम्मान कितना जरूरी होता है। धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर किसी की आस्था को ठेस पहुंचाना सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। समाज के जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वे ऐसे मौके पर संयम बरतें और दोषियों की पहचान में पुलिस की मदद करें ताकि देश की साझा संस्कृति को नुकसान न पहुंचे।