Swachh Bharat Survey: स्वच्छता में फिर बजा इंदौर का डंका! लगातार आठवीं बार देश का सबसे साफ शहर घोषित

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By Sharma Published On: July 17, 2025
Swachh Bharat Survey: स्वच्छता में फिर बजा इंदौर का डंका! लगातार आठवीं बार देश का सबसे साफ शहर घोषित

Swachh Bharat Survey: 17 जुलाई को घोषित हुए स्वच्छ भारत सर्वेक्षण 2024 के नतीजों में एक बार फिर इंदौर ने बाज़ी मार ली है। इंदौर ने लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल कर नया इतिहास रच दिया है। विज्ञान भवन दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने यह पुरस्कार इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को प्रदान किया। इंदौर की इस कामयाबी पर पूरे देश से बधाइयों का तांता लग गया है।

सूरत और नवी मुंबई भी रहे टॉप में

इस बार सर्वेक्षण को जनसंख्या के आधार पर पांच श्रेणियों में बांटा गया। 10 लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में इंदौर पहले स्थान पर रहा। वहीं गुजरात का सूरत दूसरे और नवी मुंबई तीसरे स्थान पर रहा। विजयवाड़ा को चौथा स्थान मिला। इंदौर और सूरत ने पिछले वर्ष यह खिताब साझा किया था लेकिन इस बार इंदौर ने अकेले बाज़ी मारी है।

नोएडा बना 3 से 10 लाख की श्रेणी में नंबर वन

तीन से दस लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में नोएडा ने पहला स्थान प्राप्त किया है। उसके बाद क्रमश: चंडीगढ़, मैसूर, उज्जैन, गांधीनगर और गुंटूर ने स्थान प्राप्त किए। यह दिखाता है कि उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक अब शहरों में स्वच्छता को लेकर सजगता बढ़ी है। खासतौर पर नोएडा जैसे तकनीकी हब का नंबर वन आना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

छोटे शहरों ने भी दिखाई बड़ी कामयाबी

50 हजार से तीन लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में नई दिल्ली पहले स्थान पर रही। तिरुपति, अंबिकापुर और लोनावला ने भी अपनी शानदार स्थिति से सबको चौंकाया। वहीं 20 से 50 हजार की आबादी वाले शहरों में महाराष्ट्र का वीटा पहले स्थान पर रहा जबकि सासवड और देवलानी परवाड़ा ने भी सराहनीय प्रदर्शन किया।

पंचगनी बना सबसे स्वच्छ छोटा शहर

20 हजार से कम जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में पंचगनी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद पाटन, पन्हाला, विश्रामपुर और बुधनी जैसे छोटे लेकिन प्रभावशाली शहरों ने साफ-सफाई के मामले में मिसाल कायम की। इससे यह साबित होता है कि स्वच्छता अब सिर्फ बड़े शहरों की नहीं बल्कि छोटे कस्बों और नगरों की भी प्राथमिकता बन चुकी है।