Madhya Pradesh में कुपोषण पर जंग या मजाक? बच्चों के लिए ₹12 और गायों के लिए ₹40 का पोषण!

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By Sharma Published On: August 5, 2025
Madhya Pradesh में कुपोषण पर जंग या मजाक? बच्चों के लिए ₹12 और गायों के लिए ₹40 का पोषण!

Madhya Pradesh में कुपोषण के खिलाफ सरकार ने वर्षों से जंग छेड़ी हुई है, लेकिन इस जंग के तरीके और संसाधनों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में दिए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं — जहां एक ओर गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के पोषण पर प्रति दिन केवल ₹12 खर्च किए जा रहे हैं, वहीं गौशालाओं में गायों के भोजन पर ₹40 प्रतिदिन खर्च हो रहे हैं। यह आंकड़ा सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है और इसी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा है।

 विधानसभा में उठा सवाल, विपक्ष ने जताई नाराज़गी

विधानसभा में जब यह सवाल उठा कि सरकार बच्चों के पोषण के लिए कितना खर्च करती है, तो जवाब सुनकर हंगामा मच गया। जवाब में बताया गया कि केंद्र सरकार की ओर से गंभीर कुपोषित बच्चों को ₹12 प्रतिदिन की पूरक पोषण सहायता दी जा रही है। कांग्रेस ने इसे बेहद शर्मनाक बताया और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।

Madhya Pradesh में कुपोषण पर जंग या मजाक? बच्चों के लिए ₹12 और गायों के लिए ₹40 का पोषण!

 कांग्रेस का हमला: “बच्चों को ₹12, नेता खा रहे काजू-बादाम”

कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा, “जब नेता विधानसभा में ₹19000 के काजू-बादाम खा रहे हैं, तब आदिवासी अंचलों में बच्चे भूख से मर रहे हैं। क्या यही है सुशासन?” उन्होंने पूछा कि क्या गायों की जान बच्चों से अधिक कीमती हो गई है?

आदिवासी जिलों में भयावह स्थिति

राज्य के आदिवासी बहुल जिलों जैसे — श्योपुर, धार, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा और बालाघाट — में स्थिति और भी चिंताजनक है। रिपोर्टों के अनुसार, इन जिलों में हर चौथा बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित है। इन क्षेत्रों में कुपोषण के कारण बच्चों की मृत्यु दर भी बढ़ती जा रही है, जो नीति निर्माताओं के लिए एक चेतावनी है।

क्या बदलेगी सरकार की प्राथमिकता?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव लाएगी? जब संसाधनों की बात आती है तो क्या गायों को बच्चों से ऊपर रखा जाना चाहिए? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को नजरअंदाज किया गया, तो आने वाले समय में एक पूरी पीढ़ी विकास से वंचित रह जाएगी।