DU प्रोफेसर हत्याकांड: आरोपी निकला करोड़ों की ठगी का मास्टरमाइंड

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By Input Published On: June 9, 2026

दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर देबोस्मिता पाल की हत्या का मामला अब केवल एक आपराधिक वारदात नहीं रह गया है। जांच आगे बढ़ने के साथ ऐसे खुलासे हो रहे हैं, जिन्होंने पुलिस को भी चौंका दिया है। मुख्य आरोपी रामप्रसाद दास के घर से बरामद सामान और उसके आपराधिक इतिहास ने इस केस को और गंभीर बना दिया है।

1400 किलोमीटर दूर से रची गई साजिश

पुलिस जांच के अनुसार, पश्चिम बंगाल के बर्धमान निवासी रामप्रसाद दास अपनी पत्नी बनाश्री के साथ करीब 1400 किलोमीटर की दूरी तय कर दिल्ली पहुंचा था। आरोप है कि उसने पहले कई बार प्रोफेसर के घर की रेकी की और फिर सुनियोजित तरीके से हत्या को अंजाम दिया।

जांच में सामने आया है कि प्रोफेसर ने उसे घर खाली करने की चेतावनी दी थी। इसी विवाद ने कथित तौर पर हत्या की साजिश को जन्म दिया।

एआई कैमरों ने ऐसे खोला पूरा राज

आरोपितों ने मास्क पहनकर और वारदात के बाद कपड़े बदलकर पहचान छिपाने की कोशिश की। लेकिन दिल्ली पुलिस की तकनीकी जांच उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई।

एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों की मदद से पुलिस ने आंखों, बालों और शारीरिक बनावट का विश्लेषण किया। डिजिटल स्केच तैयार होने के बाद प्रोफेसर के परिजनों ने आरोपितों की पहचान की। इसके बाद मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस उन तक पहुंच गई।

घर से मिला चौंकाने वाला सामान

पुलिस को आरोपी के घर से कई संदिग्ध वस्तुएं मिलीं। इनमें पश्चिम बंगाल पुलिस के नाम पर बने फर्जी पहचान पत्र, नकली बैज, रेलवे टीटीई का फर्जी बैज और नकली नोटों की गड्डियां शामिल हैं।

इसके अलावा लगभग 25 महंगी घड़ियां, 100 से अधिक शर्ट और प्रोफेसर की कार की तस्वीरें भी बरामद हुई हैं। यह बरामदगी आरोपी की कथित ठगी और धोखाधड़ी के नेटवर्क की ओर इशारा करती है।

50 लोगों से दो करोड़ रुपये की ठगी का आरोप

पुलिस के अनुसार, दसवीं पास रामप्रसाद दास लंबे समय से लोगों को झांसा देकर पैसे ऐंठता रहा है। शुरुआती जांच में करीब 50 लोगों से लगभग दो करोड़ रुपये की ठगी की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि वह लोगों से बड़ी रकम उधार लेकर वापस नहीं करता था और अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कर भरोसा जीतता था।

तकनीक और अपराध के बीच नई जंग

यह मामला केवल एक हत्या की जांच नहीं, बल्कि आधुनिक पुलिसिंग और तकनीक की ताकत का उदाहरण भी बन गया है। जहां आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए हर संभव कोशिश की, वहीं एआई तकनीक ने उसके सारे बचाव तोड़ दिए।

देबोस्मिता पाल हत्याकांड यह दिखाता है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी बरत लें, डिजिटल युग में सबूतों के निशान मिटाना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। यही इस मामले की सबसे बड़ी सीख और सबसे बड़ा संदेश है।