दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: अनिरुद्धाचार्य से जुड़े फर्जी कंटेंट हटाने के निर्देश, AI-डीपफेक पर सख्ती

Author Picture
By Input Published On: April 4, 2026
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: अनिरुद्धाचार्य से जुड़े फर्जी कंटेंट हटाने के निर्देश, AI-डीपफेक पर सख्ती

राजधानी दिल्ली में Delhi High Court ने मशहूर कथावाचक Aniruddhacharya (पूकी बाबा) के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा को लेकर एक अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उनके नाम, आवाज और छवि का अनधिकृत इस्तेमाल करने वाले फर्जी कंटेंट पर सख्त रोक लगाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे सभी कंटेंट तुरंत हटाने का निर्देश दिया है।

यह आदेश 30 मार्च को जस्टिस Tushar Rao Gedela ने अनिरुद्धाचार्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति किसी व्यक्ति की पहचान का उपयोग करना—चाहे वह मीम्स, वीडियो या एआई और डीपफेक तकनीक से तैयार सामग्री के रूप में हो—कानूनी उल्लंघन है।

कोर्ट ने Meta, X (पूर्व में ट्विटर) और Google जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता द्वारा चिन्हित सभी आपत्तिजनक और भ्रामक कंटेंट को तुरंत हटाएं। साथ ही यह भी कहा गया कि भविष्य में इस तरह के किसी भी अनधिकृत उपयोग को रोका जाए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला केवल पैरोडी या मजाक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक व्यक्ति की छवि और साख को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। कोर्ट ने माना कि अनिरुद्धाचार्य ने वर्षों की आध्यात्मिक साधना और प्रवचनों के माध्यम से अपनी पहचान और प्रतिष्ठा बनाई है, जिसे इस तरह के फर्जी कंटेंट से क्षति पहुंच रही है।

याचिका में अनिरुद्धाचार्य ने आरोप लगाया था कि कई संस्थाएं और व्यक्ति बिना उनकी अनुमति के उनकी छवि, आवाज और नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे न सिर्फ उनकी छवि खराब हो रही है बल्कि अवैध व्यावसायिक लाभ भी कमाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कंटेंट इस तरह तैयार किए गए हैं, जिनसे यह झूठा संदेश जाता है कि वे किसी धोखाधड़ी या संदिग्ध योजनाओं से जुड़े हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो होने वाला नुकसान अपूरणीय होगा, जिसकी भरपाई केवल आर्थिक मुआवजे से संभव नहीं है।

इस फैसले को डिजिटल युग में व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब एआई और डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है।