grandson’s
बेटों ने 88 साल की मां को मारा, पोता बोल- अस्थियां विसर्जित करने का समय नहीं मिला
ग्वालियर। बेटा, मेरा क्या कसूर था मैं तो बस बूढ़ी हो गई थी, तुम्हें भी ऐसा ही होना है। मानती हूं कि मैं अब चलने-फिरने में असमर्थ हो गई थी,
ग्वालियर। बेटा, मेरा क्या कसूर था मैं तो बस बूढ़ी हो गई थी, तुम्हें भी ऐसा ही होना है। मानती हूं कि मैं अब चलने-फिरने में असमर्थ हो गई थी,