संसद का शीतकालीन सत्र और 26 जनवरी को होने वाली परेड को सता रहा कोरोना का डर

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Session of Parliament

नई दिल्ली। इस बार संसद का शीतकालीन सत्र (Session of Parliament) और 26 जनवरी को राजपथ पर होने वाली परेड, दोनों पर कोरोना का गहरा साया है। इस कारण संसद सत्र (Session of Parliament) होने की संभावना बेहद कम है। उसी तरह गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडोतोलन तो होगा लेकिन परेड व झांकी को लेकर सरकारी स्तर पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। जानकार सूत्रों के मुताबिक इस बावत दीपावली के बाद उच्च स्तरीय बैठक में विशेष समिति की गोपनीय रिपोर्ट पर विचार विमर्श के बाद कोई फैसला लिया जाएगा। मौजूदा हालात को देखते हुए परेड निकलने की संभावना बेहद क्षीण है।

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छह महीने में सत्र बुलाना अनिवार्य –

शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के तीसरे हते से शुरू होकर दिसंबर के तीसरे हते तक चलता है। पिछली बार दिसंबर के आखिर तक सत्र चला गया था। इस बार अभी तक कोई हलचल नहीं है और पिछले ही महीने खत्म हुए संसद सत्र के बाद छह महीने तक सत्र बुलाने की कोई संवैधानिक बाध्यता भी नहीं है। पिछला सत्र इसलिए भी बुलाना था क्योंकि आखिरी सत्र मार्च में हुआ था और छह महीने में सत्र बुलाने की अनिवार्यता थी। दूसरे, सरकार ने बड़ी संख्या में अध्यादेश जारी किए थे, जिनको संसद से मंजूर करा कर कानून का रूप दिलाना था। इसलिए सरकार ने सत्र बुलाया और सारे जरूरी विधेयक पास करा लिए।

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कोरोना की वजह से किया 10 दिन में सत्र खत्म –

सत्र के दौरान ही बड़ी संख्या में सांसद और संसद के कर्मचारी कोरोना से संक्रमित होने लगे, जिस वजह से तीन हफ्ते का सत्र 10 दिन में खत्म करना पड़ा। इसलिए सरकार और संसद के पीठासीन अधिकारी भी इस बार कोई जोखिम लेने से बचना चाहते हैं और सीघे बजट सत्र बुलाना चाहते हैं। गणतंत्र दिवस पर निकलने वाली परेड को लेकर भी सरकार अभी तक डोल ड्रम में हौ। वैसे 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह करोना के वंदिशों के बीच ही मनाया गया था लेकिन 26 जनवरी के समारोह को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।

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सीधे बजट सत्र बुलाने पर चल रहा विचार

रूस के राष्ट्रपति पुतिन होंगे मेहमान सूत्रों ने बताया कि दो देशों के राष्ट्राघ्यक्ष के नामों पर चर्चा जरूर हुई थी। ये दो राष्ट्राध्यक्ष हैं रूस के राष्ट्रपति पुतिन और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना। लेकिन समारोह को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है । सूत्रों ने बताया कि गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन सुरक्षित तरीके से कैसे हो सकता है, इन पहलुओं को टटोलने के लिए विशेषज्ञों से रायशुमारी का जा रही है। दीपावली के बाद इस सिलसिले में बुलाई जाने वाली बैठक में परेड निकलने या न निकलने को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा।

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