बांग्लादेश की वर्तमान सरकार द्वारा भारत के साथ संबंधों में दूरी बनाने की कोशिशें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पूर्व राजनयिकों का मानना है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को तूल देना केवल एक कूटनीतिक बहाना है, जिसका उद्देश्य भारत के साथ संवाद को टालना है।
प्रत्यर्पण का कानूनी पेच
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्यर्पण एक जटिल और लंबी कानूनी प्रक्रिया है, जिसे रातों-रात पूरा नहीं किया जा सकता। तारिक रहमान सरकार इसे एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि भारत के साथ आधिकारिक यात्राओं और द्विपक्षीय चर्चाओं से बचा जा सके।
सत्ता का डर और सियासी समीकरण
सत्ता संभालने के बाद तारिक रहमान का रुख काफी बदल गया है। माना जा रहा है कि अवामी लीग के प्रति जनता के बीच बढ़ते समर्थन से सरकार घबराई हुई है और अपनी गिरती साख को बचाने के लिए भारत विरोधी रुख अपना रही है।