पाकिस्तान के दमनकारी शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहे बलूचिस्तान की नजरें आज भारत पर टिकी हैं। इन दोनों क्षेत्रों के बीच का रिश्ता केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि हजारों साल पुराने इतिहास और साझा संस्कृति की मजबूत नींव पर आधारित है।
मेहरगढ़ और हिंगलाज माता का महत्व
बलूचिस्तान में स्थित मेहरगढ़ की सभ्यता सिंधु घाटी से भी प्राचीन मानी जाती है, जो भारत के साथ इसके गहरे जुड़ाव को दर्शाती है। इसके अलावा, 51 शक्तिपीठों में शुमार हिंगलाज माता का मंदिर, जिसे स्थानीय लोग ‘नानी मां’ कहते हैं, दोनों क्षेत्रों के बीच अटूट धार्मिक आस्था का केंद्र है।
भाषाई समानताएं
सांस्कृतिक कड़ियों के अलावा, बलूचिस्तान में बोली जाने वाली ‘ब्राहुई’ भाषा का सीधा संबंध दक्षिण भारत के द्रविड़ भाषा परिवार से है। यह भाषाई समानता प्राचीन काल से चले आ रहे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और गहरे ऐतिहासिक संबंधों का एक और प्रमाण है।