संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की हालिया बैठक में भारत की लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली की सराहना की गई है। यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाने के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाने के भारतीय तरीके को दुनिया के लिए एक आदर्श मिसाल बताया है।
लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक
यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी-डंडे चलाने के बजाय सीधे संवाद करना ही समस्याओं का सबसे प्रभावी समाधान है। भारत के इस दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता के रूप में सराहा गया है।
चीन और पाकिस्तान पर सवाल
इस बैठक में भारत की प्रशंसा के साथ ही चीन और पाकिस्तान की भी कड़ी आलोचना की गई। शिनजियांग और तिब्बत में मानवाधिकारों के हनन और पाकिस्तान में प्रदर्शनकारियों पर किए गए अत्याचारों को लेकर दोनों देशों को वैश्विक मंच पर कठघरे में खड़ा किया गया।