2023 के चुनाव में सिंधिया समर्थक के कई नेताओं की बढ़ सकती है मुसीबत

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By Sharma Published On: December 17, 2022

भोपाल। कमल नाथ सरकार गिराकर कांग्रेस के जो विधायक और मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए थे, उन्हें वर्ष 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव में फिर से टिकट दिए जाने की पूरी गारंटी नहीं है। भाजपा इससे परहेज भी कर सकती है। पार्टी के बड़े नेताओं के अनुसार कांग्रेस से भाजपा में आने वाले इन नेताओं के साथ जो सहमति बनी थी, उसके तहत सिर्फ एक बार टिकट देने की शर्त थी। इन्हें उपचुनाव में टिकट देकर शर्त पूरी कर दी गई थी। आने वाले चुनाव में भी भाजपा उन्हीं नेताओं पर दांव लगाए, ऐसा कोई वादा नहीं हुआ था।

 

इन्हीं संकेतों की वजह से कांग्रेस से भाजपा में आए ऐसे बहुत सारे नेताओं को भविष्य की चिंता सताने लगी है। हालांकि भाजपा सूत्रों का कहना है कि जिन नेताओं की छवि और कामकाज बेहतर है व जिनकी जीत की संभावना है, पार्टी उन्हें अपना प्रत्याशी बनाएगी। जिन नेताओं के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं का सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा है, ऐसे नेताओं से पार्टी किनारा करेगी।

 

 

कमल नाथ सरकार गिरने के बाद जब विधानसभा की 28 सीटों पर एक साथ उपचुनाव हुए तो उनमें सर्वाधिक सीटें ग्वालियर-चंबल की थीं। यहां 2020 में 16 सीटों पर उपचुनाव हुए, जिसमें भाजपा के पास 10 सीटें ही आई थीं, जबकि सरकार में भाजपा के होते हुए पूरी ताकत लगाने के बावजूद छह सीटों पर कांग्रेस जीत गई। मंत्री इमरती देवी, एंदल सिंह कंसाना और गिर्राज दंडोतिया तक चुनाव हार गए थे। अब बदली हुई परिस्थितियों में पूरे क्षेत्र में कांग्रेस एकजुट है। ऐसे में भाजपा के सामने प्रत्याशियों का चयन जटिल हो गया है। पार्टी यदि कांग्रेस से आए प्रत्याशियों पर ही दांव लगाती है तो उसके कार्यकर्ता चुनाव में कितना साथ देंगे, इसका भरोसा नहीं है।