बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर एक ऐसा मंदिर है जो आस्था के साथ राष्ट्रप्रेम का अनूठा संगम है। यहाँ देवी-देवताओं के बजाय देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले 41 वीर शहीदों और नारी शक्तियों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यह स्थान स्वतंत्रता दिवस जैसे खास मौकों के अलावा साल के हर दिन देश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का केंद्र बना रहता है।
पूर्व जज की अनूठी पहल
इस मंदिर की स्थापना वर्ष 2008 में सेवानिवृत्त जज दान सिंह चौधरी ने की थी। उनका मानना था कि शहीदों की मूर्तियां चौराहों पर उपेक्षित रह जाती हैं, इसलिए उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति की राशि से इस मंदिर का निर्माण कराया ताकि वीर सपूतों को प्रतिदिन सम्मान मिल सके।
परमवीर चक्र विजेताओं को समर्पित
मंदिर परिसर में 21 परमवीर चक्र विजेताओं के साथ-साथ जनरल के.एम. करियप्पा, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नायकों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां आने वाले लोग इन प्रतिमाओं के माध्यम से शहीदों के शौर्य और उनके बलिदान की गाथाओं से रूबरू होते हैं।