बिलासपुर के रहने वाले विपिन परमार ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को कभी बाधा नहीं बनने दिया। आंखों से दिखाई न देने के बावजूद वे लाठी के सहारे शहर की सड़कों पर निकलकर राखी बेचते हैं और अपनी मेहनत से स्वाभिमान के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।
मेहनत से बनी पहचान
विपिन अपनी इस छोटी सी दुकान के जरिए रोजाना 800 से 1000 रुपये तक की कमाई कर लेते हैं। उनकी यह लगन न केवल उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत भी है।
प्रेरणा की मिसाल
विपिन का हौसला यह साबित करता है कि इच्छाशक्ति हो तो कोई भी कमी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। उनकी कहानी उन लोगों के लिए एक सबक है जो विपरीत परिस्थितियों में हार मान लेते हैं।