छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में बरसात के दौरान ग्रामीण अपनी खाद्य जरूरतों के लिए पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर रहते हैं। यहाँ के लोग जंगलों से कोचई के पत्ते चुनकर लाते हैं और उन्हें सुखाकर चावल के माड़ (पसिया) के साथ एक विशेष व्यंजन तैयार करते हैं।
पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा
यह अनोखी सब्जी बनाने की विधि सदियों पुरानी है, जिसे स्थानीय लोग आज भी संजोए हुए हैं। इस पारंपरिक तरीके से खाना बनाने के कारण ग्रामीण बाजार की महंगी और रसायनों वाली सब्जियों पर निर्भर नहीं रहते हैं।
स्वास्थ्य और स्वाद का मेल
चावल के माड़ के साथ कोचई पत्तों का मेल न केवल एक अनोखा स्वाद देता है, बल्कि यह बेहद पौष्टिक भी होता है। यह व्यंजन सरगुजा के ग्रामीण जीवनशैली और उनके प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का एक बेहतरीन उदाहरण है।