छत्तीसगढ़ के बोदेली गांव की रहने वाली अंजुलता ने विपरीत परिस्थितियों को मात देकर नीट परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की है। पिता के निधन के बाद आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने लालटेन की रोशनी में अपनी पढ़ाई जारी रखी। अब वे एमबीबीएस कर डॉक्टर बनने की राह पर हैं।
मजदूरी कर मां ने दिया साथ
अंजुलता की मां ने दिहाड़ी मजदूरी करके अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। मां के अटूट विश्वास और अंजुलता की मेहनत का ही परिणाम है कि उन्होंने नीट यूजी में एसटी वर्ग में 146वीं रैंक प्राप्त की है।
संघर्ष से मिली नई पहचान
वनांचल के छोटे से गांव से निकलकर मेडिकल कॉलेज तक का यह सफर कई युवाओं के लिए प्रेरणा है। संसाधनों की कमी के बावजूद अंजुलता ने साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।