नेपाल की सत्ता में बड़े बदलाव के बाद बालेन शाह प्रधानमंत्री बने थे, जिन्हें युवाओं का खासा समर्थन प्राप्त था। हालांकि, कार्यभार संभालने के महज 150 दिनों के भीतर ही उनकी सरकार कई विवादों और जन-आक्रोश के केंद्र में आ गई है।
विवादों में घिरी नीतियां
गोरखा सैनिकों के मुद्दों से लेकर कस्टम ड्यूटी तक के फैसलों ने सरकार के खिलाफ असंतोष को हवा दी है। इन निर्णयों के चलते प्रधानमंत्री को संसद के भीतर और बाहर कड़ा विरोध झेलना पड़ रहा है।
क्या खत्म हुआ पॉलिटिकल हनीमून?
सत्ता में आने के बाद का शुरुआती दौर अब चुनौतियों से भरा नजर आ रहा है। जनता के बढ़ते दबाव और राजनीतिक खींचतान के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या बालेन शाह का राजनीतिक ‘हनीमून पीरियड’ अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है।