बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने प्रदेश में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर मौतों के वास्तविक आंकड़े छिपाने और असंवेदनशील होने का गंभीर आरोप लगाया है।
आंकड़ों की बाजीगरी पर सवाल
सिंघार का दावा है कि बालाघाट में अब तक 26 मासूमों की जान जा चुकी है, जबकि प्रशासन के आंकड़े इससे काफी कम हैं। उन्होंने एक बच्चे का अंतिम संस्कार माता-पिता के आने से पहले किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई
बिरसा विकासखंड के गांवों में फैली बीमारी के कारणों में मलेरिया, कुपोषण और संक्रमण जैसी समस्याएं सामने आई हैं। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला टीकाकरण और मलेरिया अधिकारियों को हटा दिया है, हालांकि विपक्ष इसे महज खानापूर्ति बता रहा है।