बरसात के मौसम में नमी के कारण पशुओं में ‘टिक’ यानी किलनी का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। यह समस्या न केवल पशुओं को कमजोर बनाती है, बल्कि कई जानलेवा बीमारियों का कारण भी बन सकती है। समय रहते सावधानी बरतना पशुपालकों के लिए बेहद आवश्यक है।
बीमारियों का खतरा और लक्षण
किलनी के काटने से पशुओं में खून की कमी (एनीमिया) और तेज बुखार जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। यदि इनका सही समय पर उपचार न किया जाए, तो पशु की स्थिति गंभीर हो सकती है और यह संक्रमण अन्य पशुओं में भी फैल सकता है।
बचाव के उपाय
पशुओं को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए उनके बाड़े और आसपास के स्थानों की नियमित सफाई करें। पशु चिकित्सकों की सलाह से उचित कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें और संक्रमित पशुओं को तुरंत उपचार प्रदान करें ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके।