छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी हमले को 13 साल बीत चुके हैं, लेकिन उस भयावह घटना की यादें आज भी लोगों को झकझोर देती हैं। इस हमले के प्रत्यक्षदर्शी विवेक वाजपेयी ने हाल ही में उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि कैसे गोलियां बारिश की तरह बरस रही थीं।
हमले की खौफनाक यादें
विवेक वाजपेयी के अनुसार, उस दिन नक्सलियों ने काफिले को चारों तरफ से घेर लिया था, जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं था। आज भी उनकी गाड़ी पर लगे गोलियों के गहरे निशान उस वीभत्स घटना की गवाही देते हैं, जिसे भुला पाना असंभव है।
न्याय की लंबी प्रतीक्षा
इस भीषण हमले के 13 साल बाद अब मामले में अंतिम फैसला आया है। पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए यह लंबा इंतजार न्याय की उम्मीद के साथ उस त्रासदी के दर्द को फिर से ताजा कर गया है।