बेटी-दामाद ने एक कारोबारी से ठगा 1.62 करोड़ का सोना

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ग्वालियर। दोस्त की बेटी-दामाद ने ही एक कारोबारी के साथ 1.62 करोड़ के सोने की ठगी कर ली। मणप्पुरम गोल्ड लोन के मैनेजर की मदद से इन्होंने पुश्तैनी सोने पर 1% ब्याज का लालच दिया। उन्होंने सवा तीन किलो सोना मणप्पुरम गोल्ड बैंक जयेन्द्रगंज में रखवा दिया। कुछ महीने तक ब्याज दिया, लेकिन इस बीच दोस्त की बेटी ने गोल्ड निकालने के साथ ही बैंक से 80 लाख रुपए का लोन भी ले लिया। जरूरत पड़ने पर गहने मांगने पर मामले का खुलासा हुआ। इंदरगंज पुलिस ने मंगलवार काे आरोपी दंपति और बैंक मैनेजर पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।

 

शहर के हरिशंकरपुरम निवासी महेश पुत्र हरीश चंद्र जैन कारोबारी है। बीते 20 साल से शिन्दे की छावनी निवासी चन्द्रमोहन शर्मा से उनकी दोस्ती है। चन्द्रमोहन की बेटी रश्मि शर्मा और दामाद विक्रम चौधरी का भी कारोबारी के घर आना जाना रहता था। कई बार उन्होंने कैश लिया और वापस कर गए। बीस साल की दोस्ती में एक विश्वास पनप गया था। दोनों के बीच परिवारिक संबंध हो गए थे।सितंबर 2018 में रश्मि शर्मा और विक्रम उनके घर आए और बताया कि मणप्पुरम गोल्ड बैंक में वह एजेंट वहां एक नई स्कीम लॉन्च हुई है, जिसमें अगर बैंक से जुड़े कर्मचारी या उनके परिचित अपना सोना बैंक में रखते हैं तो इसके बदले में डेढ़ प्रतिशत ब्याज मिलता है। इस पर रश्मि ने कारोबारी महेश जैन को बताया कि यदि रश्मि के नाम से वह अपना कुछ सोना गोल्ड बैंक में रखते है तो इसके बदले में वह एक प्रतिशत उनकों तथा आधा प्रतिशत खुद रख लेगी। वैसे भी घर पर तिजोरी में रखे सोना का क्या होगा।

कारोबारी महेश जैन ने बताया कि उसे 1% में ज्यादा इंट्रेस्ट नहीं था तो विक्रम व रश्मि ने बताया कि इसमें उनका कोई नुकसान नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा और फायदा है, क्योंकि बैंक में रखा उनका सोना सुरक्षित रहेगा और जब भी उन्हें जरूरत होगी, रसीद लेकर जाने पर उनका सोना उन्हें वापस मिल जाएगा। इसके बाद रश्मि व विक्रम ने उन्हें मणप्पुरम गोल्ड लोन के जयेन्द्रगंज ब्रांच मैनेजर पवन परिहार से मिलवाया। ब्रांच मैनेजर ने भी इस स्कीम की पुष्टि की तो सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने अपना सवा तीन किलो सोना बैंक में रख दिया। रश्मि के नाम से गोल्ड लोन बैंक में जमा था, तो उसके नाम की रसीद उसने भरोसे के लिए कारोबारी को दे दी। रश्मि ने सोने पर 14 सितंबर 2018 से 10 अक्टूबर 2019 तक ब्याज दिया। इस दौरान वह धीरे-धीरे बैंक से सोना निकालती रही।

जरूरत पड़ने पर गोल्ड उठाने गए तो हुआ ठगी का खुलासा
जरूरत पड़ने पर उन्होंने रश्मि से गोल्ड वापस दिलवाने को कहा। इस पर वह आजकल कहकर टालने लगे। संदेह हुआ तो वह 20 अक्टूबर 2020 को मणप्पुरम गोल्ड बैंक पहुंचा। यहां पता चला कि रश्मि के नाम से सोना जमा होने से उन्होंने उसे निकाल लिया है। जो कुछ सोना बचा है, उस पर उन्होंने 80 लाख रुपए का लोन ले लिया है। जब उन्होंने पूछा कि गोल्ड जमा की रसीद तो उनके पास है तो बताया गया कि रश्मि दो निकलवाती थी। एक कारोबारी देकर दूसरी अपने पास रखती थी। घटना का पता चलते ही कारोबारी विक्रम और रश्मि के पास पहुंचे तो उन्होंने बताया कि उन्हें जरूरत थी, इसलिए उनके सोने पर उन्होंने लोन लिया था, जल्द ही वह रुपए उन्हें लौटा देंगे।

कारोबारी ने रुपए वापस मांगे तो आरोपियों ने उन्हें 80 लाख रुपए के चार चेक थमाते हुए कहा कि अगर विश्वास नहीं है तो वह यह चेक रख लें। रुपए नहीं लौटाने की स्थिति में 12 दिन बाद चेक लगाकर बैंक से अपने जेवर उठा लें। नियत समय पूरा होने के बाद वह बैंक पहुंचे तो पता चला कि यह चेक नहीं बल्कि, डमी वाउचर हैं। कुछ समय तक दोनों परिवार के लोग आपस में बातचीत कर कैश लौटाने की बात करते रहे, लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो मामला थाने पहुंचा। CSP विजय भदौरिया का कहना है कि कारोबारी की शिकायत पर जांच के बाद मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।

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